दिवाकर श्रीवास्तव (NNI Coverage)
*भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम आवास बनवाने के एवज में हितग्राहियों से वसूले जा रहे 10 से 40 हजार रुपए।*
उत्तरप्रदेश के बहराइच जनपद के आदर्श नगर पालिका नानपारा शहरी क्षेत्र में अपात्रों को फर्जी तरीके से प्रधानमंत्री आवास देने का मामला सामने आया है। नगर पालिका ने बगैर सत्यापन किए लोगों को पीएम आवास बांट दिए। बताया जा रहा है कि नगर पालिका ने दलालों के दबाव में यह सूची तैयारी की थी। कुछ ऐसे लोगों को भी पीएम आवास दिए गए जो पहले से पक्के मकानों में रह रहे थे।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी वार्ड नंबर 22 में हुई है। यहां पर एक दर्जन से अधिक साधन संपन्न अपात्रों को पीएम आवास दिए गए जबकि हकीकत में ऐसे गरीबों को आवास मुहैया नहीं कराया गया है जो पॉलिथीन के सहारे गुजर बसर कर रहे हैं, जिनके घर में कोई कमाने वाला नहीं है और जो रोजी रोटी को तरस रहे हैं। अगर इस सूची की बारीकी के साथ पुनः जांच कराई जाए तो सूची में फर्जीवाड़ा सामने आ जाएगा।
बता दें कि वार्ड नम्बर 22 जो कि शहरी क्षेत्र से सटा हुआ है, उनमें अधिकतर गरीब परिवार निवास करते हैं। सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी नानपारा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। पीड़ितों की शिकायत है कि पालिका में सभासद, जांच अधिकारी और अधिशासी अधिकारी योजना के तहत हितग्राहियों से पीएम आवास बनवाने के लिए 10 हजार से 40 हजार रूपए वसूल रहे है। इस संबंध में अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार तिवारी से पूछा गया तो वह सीधे अपनी जिम्मेदारी से मुकर गए और कहा, "जाँच करना हमारा काम नहीं है, न हम आवास देते हैं और न ही कुछ बता पाएंगे।" तो जनाब जब आपको अपने क्षेत्र का हाल नही पता तो नौकरी से इस्तीफा दे दीजिये, या फिर आपने भी आवास के मामले में लाखों डकारे होंगे।
जनपद बहराइच के आदर्श नगर पालिका नानपारा में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में पीड़ित पात्रों ने पालिका के सभासद, जाँच अधिकारी और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ पीएम आवास में वसूली करने का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत एसडीएम नानपारा और परियोजना अधिकारी डूडा बहराइच से की है। एसडीएम नानपारा और परियोजना अधिकारी बहराइच ने बताया कि नानपारा के मोहल्ला किला वार्ड नम्बर 22 की शिकायत आई है। शिकायत पर जांच के आदेश दे दिए गए है जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
अब देखना ये है कि क्या प्रधानमंत्री का सपना सच होगा या अधिकारियों की बल्ले बल्ले रहेगी और बेघर पॉलिथीन में ही जिंदगी तो नहीं गुजारेंगे।
*भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम आवास बनवाने के एवज में हितग्राहियों से वसूले जा रहे 10 से 40 हजार रुपए।*
उत्तरप्रदेश के बहराइच जनपद के आदर्श नगर पालिका नानपारा शहरी क्षेत्र में अपात्रों को फर्जी तरीके से प्रधानमंत्री आवास देने का मामला सामने आया है। नगर पालिका ने बगैर सत्यापन किए लोगों को पीएम आवास बांट दिए। बताया जा रहा है कि नगर पालिका ने दलालों के दबाव में यह सूची तैयारी की थी। कुछ ऐसे लोगों को भी पीएम आवास दिए गए जो पहले से पक्के मकानों में रह रहे थे।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी वार्ड नंबर 22 में हुई है। यहां पर एक दर्जन से अधिक साधन संपन्न अपात्रों को पीएम आवास दिए गए जबकि हकीकत में ऐसे गरीबों को आवास मुहैया नहीं कराया गया है जो पॉलिथीन के सहारे गुजर बसर कर रहे हैं, जिनके घर में कोई कमाने वाला नहीं है और जो रोजी रोटी को तरस रहे हैं। अगर इस सूची की बारीकी के साथ पुनः जांच कराई जाए तो सूची में फर्जीवाड़ा सामने आ जाएगा।
बता दें कि वार्ड नम्बर 22 जो कि शहरी क्षेत्र से सटा हुआ है, उनमें अधिकतर गरीब परिवार निवास करते हैं। सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी नानपारा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। पीड़ितों की शिकायत है कि पालिका में सभासद, जांच अधिकारी और अधिशासी अधिकारी योजना के तहत हितग्राहियों से पीएम आवास बनवाने के लिए 10 हजार से 40 हजार रूपए वसूल रहे है। इस संबंध में अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार तिवारी से पूछा गया तो वह सीधे अपनी जिम्मेदारी से मुकर गए और कहा, "जाँच करना हमारा काम नहीं है, न हम आवास देते हैं और न ही कुछ बता पाएंगे।" तो जनाब जब आपको अपने क्षेत्र का हाल नही पता तो नौकरी से इस्तीफा दे दीजिये, या फिर आपने भी आवास के मामले में लाखों डकारे होंगे।
जनपद बहराइच के आदर्श नगर पालिका नानपारा में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में पीड़ित पात्रों ने पालिका के सभासद, जाँच अधिकारी और अधिशासी अधिकारी के खिलाफ पीएम आवास में वसूली करने का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत एसडीएम नानपारा और परियोजना अधिकारी डूडा बहराइच से की है। एसडीएम नानपारा और परियोजना अधिकारी बहराइच ने बताया कि नानपारा के मोहल्ला किला वार्ड नम्बर 22 की शिकायत आई है। शिकायत पर जांच के आदेश दे दिए गए है जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
अब देखना ये है कि क्या प्रधानमंत्री का सपना सच होगा या अधिकारियों की बल्ले बल्ले रहेगी और बेघर पॉलिथीन में ही जिंदगी तो नहीं गुजारेंगे।

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