अजय शुक्ला (NNI Coverage)
*चित्रकूट/मानिकपुर*उ0प्र0। मकरसंक्रांति के अवसर पर मारकुंडी स्थित मार्कंडेय आश्रम मे लगता है तीन दिवशीय विशाल धार्मिक मेला, मेले के लिए प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की नहीं दिखी तैयारी,गंदगी से भरपूर था मेला परिसर।
प्राचीन काल से आस्था का केन्द्र रहे मार्कंडेय आश्रम मे धार्मिक मेला देखने आए श्रध्दालुओं के लिए सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं, ना शौचालय ना हैंडपंप।
_आश्रम को है एक अदद हैंडपंप की दसकों से दरकार।_
_आश्रम परिसर पर शौचालय न होना स्वच्छता अभियान की खोल रहा पोल_
*....* ग्राम पंचायत व प्रशासन के उपेक्षित रवैए के चलते मेला स्थल पर अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों में रोष।
अव्यवस्थाओं के कारण मेले में दूर-दूर से आने वाले दुकानदारों और श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का करना पड़ रहा सामना, जबकि पंचायत स्तर के जिम्मेदारों को दिए गए थे सुझाव फिर भी नहीं दिया ध्यान।
*....* क्षेत्रीय लोगों ने कहा पर्यटन की असीम संभावनाएं फिर भी यहां की सुविधाओं के बारे में सरकार का नहीं है कतई ध्यान।
आश्रम को जाने वाले मार्ग (खडंजा) मे लगता है मेला, संकरे रास्ते पर दुकानें सज जाने से भीड़ धक्का-मुक्की की होती शिकार, आश्रम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन मे होती काफी परेशानी, अगर सड़क से दोनों ओर चार-चार फिट पीछे हटाकर दुकानें लगाए जाने से स्थिति होती सामान्य।
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*दस्यु प्रभावित क्षेत्र मे लगने वाले मेले मे पूरी तरह से नदारद रही पुलिस*
_मेला सुरक्षा व्ववस्था मे दिखी कई कमियां_
_पार्किंग व्यवस्था न होने से यात्रियों को रही थी असुविधाएं_
...इस अति संवेदनशील मेला क्षेत्र मे पुलिस नहीं आई नज़र,मेले मे आई बहन बेटियां अपने को महसूस कर रही थी असुरक्षित,नहीं दिखा पुलिस का एक भी जवान, मेले मे हो चुके हैं कई दंगे, फिर भी सुरक्षाकर्मी तैनात करना भूल गई पुलिस, मार्कंडेय मेला की अपेक्षा त्रिवेणी मेला मे काफी हद तक सुरक्षा व्यवस्था दिखी ठीक, लेकिन मेला परिसर पर *यूपी खड़ी 100 डायल* गाड़ी पर नहीं दिखे पुलिस के जवान।
*चित्रकूट/मानिकपुर*उ0प्र0। मकरसंक्रांति के अवसर पर मारकुंडी स्थित मार्कंडेय आश्रम मे लगता है तीन दिवशीय विशाल धार्मिक मेला, मेले के लिए प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की नहीं दिखी तैयारी,गंदगी से भरपूर था मेला परिसर।
प्राचीन काल से आस्था का केन्द्र रहे मार्कंडेय आश्रम मे धार्मिक मेला देखने आए श्रध्दालुओं के लिए सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं, ना शौचालय ना हैंडपंप।
_आश्रम को है एक अदद हैंडपंप की दसकों से दरकार।_
_आश्रम परिसर पर शौचालय न होना स्वच्छता अभियान की खोल रहा पोल_
*....* ग्राम पंचायत व प्रशासन के उपेक्षित रवैए के चलते मेला स्थल पर अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों में रोष।
अव्यवस्थाओं के कारण मेले में दूर-दूर से आने वाले दुकानदारों और श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का करना पड़ रहा सामना, जबकि पंचायत स्तर के जिम्मेदारों को दिए गए थे सुझाव फिर भी नहीं दिया ध्यान।
*....* क्षेत्रीय लोगों ने कहा पर्यटन की असीम संभावनाएं फिर भी यहां की सुविधाओं के बारे में सरकार का नहीं है कतई ध्यान।
आश्रम को जाने वाले मार्ग (खडंजा) मे लगता है मेला, संकरे रास्ते पर दुकानें सज जाने से भीड़ धक्का-मुक्की की होती शिकार, आश्रम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन मे होती काफी परेशानी, अगर सड़क से दोनों ओर चार-चार फिट पीछे हटाकर दुकानें लगाए जाने से स्थिति होती सामान्य।
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*दस्यु प्रभावित क्षेत्र मे लगने वाले मेले मे पूरी तरह से नदारद रही पुलिस*
_मेला सुरक्षा व्ववस्था मे दिखी कई कमियां_
_पार्किंग व्यवस्था न होने से यात्रियों को रही थी असुविधाएं_
...इस अति संवेदनशील मेला क्षेत्र मे पुलिस नहीं आई नज़र,मेले मे आई बहन बेटियां अपने को महसूस कर रही थी असुरक्षित,नहीं दिखा पुलिस का एक भी जवान, मेले मे हो चुके हैं कई दंगे, फिर भी सुरक्षाकर्मी तैनात करना भूल गई पुलिस, मार्कंडेय मेला की अपेक्षा त्रिवेणी मेला मे काफी हद तक सुरक्षा व्यवस्था दिखी ठीक, लेकिन मेला परिसर पर *यूपी खड़ी 100 डायल* गाड़ी पर नहीं दिखे पुलिस के जवान।

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