Wednesday, January 23, 2019

ट्रेंनिग के नाम पर विद्यालय बन्द करके बच्चों के जिन्दगी से खिलवाड़ कर रहे शिक्षक

पंकज वर्मा (NNI Coverage)
श्रावस्ती, उ0प्र0। एक तरफ प्रदेश में बैठी योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रयासरत है फिर भी बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के हर सरकारी दावे फेल है। शिक्षकों के लापरवाही से सिस्टम पर भी खड़ा हो रहा है सवाल।
             योगी सरकार के द्वारा शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे सुधार के दावों की जमीनी हकीकत जानने के लिये हमारी टीम ने उन्ही की बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल के गृह जनपद श्रावस्ती का रुख किया। जहां हमारी टीम ने सबसे पहले प्रथमिक विद्यालय कटवा पहुँची। जहाँ पर मेन गेट खुला था, हमारी टीम अन्दर गयी कि बच्चे पढ़ रहे होंगे। मगर अंदर का नजारा कुछ अलग हीं था। जिसे जानकर आप भी चौक जाएंगे। विद्यालय में एक भी बच्चे मौजूद नही थे न ही कोई रसोइया व शिक्षक। कुछ कमरो में ताले लटक रहे थे तो कुछ खुले थे। रसोईघर के चूल्हे बयां कर रहे थे कि पिछले काफी दिनों से इसपर भगोना नही चढ़ा है। इसी बीच हमारी नजर ब्लैक बोर्ड पर गयी तो उस पर 21 जनवरी की डेट पड़ी थी और लिखा था BRC प्रशिक्षण के लिये जा रहा हूँ। चलिये एक साहब तो प्रशिक्षण पर चले गए, बाकी के गुरु जी कहाँ हैं?
               रियलिटी चेक के दौरान अब हमारी टीम प्रथमिक विद्यालय भवानी पुरवा पहुँची तो वहाँ का नजारा भी ऐसे ही दिखाई दिया। स्कूल का मेन गेट खुला था। हमारी टीम एक बार फिर बच्चों का शैक्षिक स्तर जानने अन्दर प्रवेश हुई। जहाँ पर एक भी बच्चे मौजूद नही थे। गुरु जी भी प्रशिक्षण के लिये BRC गये हुए थे। कार्यालय में ताले लटक रहे थे। रसोई घर भी बंद था कुछ कमरे यहाँ भी खुले थे तो कुछ बन्द मिले।
               आपको बता दें जनपद श्रावस्ती के ब्लाक जमुनहा अंतर्गत ज्यादातर विद्यालय आए दिन बंद रहते हैं लेकिन इनको चेक करने के नाम पर शिक्षा विभाग सिर्फ खानापूर्ति करता नजर आता है अब यह कहना गलत नहीं होगा कि शिक्षा विभाग की लचर प्रणाली के चलते शिक्षक स्कूलों से आए दिन गायब रहते हैं जिसके चलते बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस पूरे मामले पर बीएसए ओमकार राणा से जब हमारे रिपोर्टर ने दूरभाष पर बात की तो उनका यही कहना था की प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय बन्द नही किया जा सकता यदि ऐसा हुआ है तो गलत है। जांच करवा कर कार्यवाही की जायेगी।
             अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या विद्यालय बन्द करके शिक्षकों को प्रशिक्षण देना मासूमों के साथ न्याय है? एक शिक्षक की ट्रेनिग के दौरान विद्यालय के और शिक्षक कहाँ गायब रहते हैं? इस पूरे खेल में सेटिंग गेटिंग के चलते तो नहीं अपनी आंखें मूंदे हुए हैं विभागीय जिम्मेदार?

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