अखिलेश श्रीवास्तव/दिवाकर श्रीवास्तव (NNI Coverage)
बहराइच, उ0प्र0। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा माह फरवरी 2018 में आयोजित उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर समिट में उद्यमी अशोक मातनहेलिया द्वारा हस्ताक्षरित किये गये एम.ओ.यू. के परिणाम स्वरूप जनपद में स्थापित एस.के. इन्जीनियरिंग एण्ड एलाइड की वर्तमान इकाई के आधुनिकीकरण के लिए किये गये पूंजी निवेश का जनवरी 2019 में मुख्य अतिथि जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव ने उद्घाटन किया। इकाई के आधुनिकीकरण अन्तर्गत यहाॅ पर एक नयी लेज़र कटिंग तकनीक की मशीन लगायी गयी है। जिससे न केवल इकाई के उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि मानव श्रम भी कम लगेगा एवं स्क्रैप भी कम निकलेगा जिससे उत्पादन की लागत में भी कमी आयेगी। उद्घाटन अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि इकाई का आधुनिकीकरण जनपद के औद्योगिक विकास की ओर बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है।
उल्लेखनीय है कि एस.के. इन्जीनियरिंग एण्ड एलाइड वक्र्स के संस्थापक कृष्ण गोपाल मातनहेलिया द्वारा वर्ष 1972 से 1975 तक दलहन प्रोसेसिंग तकनीक पर अनुसंधान करके एक नई तकनीक विकसित की थी। जिससे दाल की उपलब्धि एंव गुणवत्ता पहले की तुलना में अधिक बढ़ गयी। पर्यावरण अनुकूल मशीनों का निर्माण कार्य के अनुसंधान में स्विटज़रलैण्ड से तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने गृह जनपद में विकसित कर प्रोसेसिंग को स्वाचालित बनाकर मानव श्रम को भी कम किया।
बहराइच, उ0प्र0। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा माह फरवरी 2018 में आयोजित उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर समिट में उद्यमी अशोक मातनहेलिया द्वारा हस्ताक्षरित किये गये एम.ओ.यू. के परिणाम स्वरूप जनपद में स्थापित एस.के. इन्जीनियरिंग एण्ड एलाइड की वर्तमान इकाई के आधुनिकीकरण के लिए किये गये पूंजी निवेश का जनवरी 2019 में मुख्य अतिथि जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव ने उद्घाटन किया। इकाई के आधुनिकीकरण अन्तर्गत यहाॅ पर एक नयी लेज़र कटिंग तकनीक की मशीन लगायी गयी है। जिससे न केवल इकाई के उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि मानव श्रम भी कम लगेगा एवं स्क्रैप भी कम निकलेगा जिससे उत्पादन की लागत में भी कमी आयेगी। उद्घाटन अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि इकाई का आधुनिकीकरण जनपद के औद्योगिक विकास की ओर बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है।
उल्लेखनीय है कि एस.के. इन्जीनियरिंग एण्ड एलाइड वक्र्स के संस्थापक कृष्ण गोपाल मातनहेलिया द्वारा वर्ष 1972 से 1975 तक दलहन प्रोसेसिंग तकनीक पर अनुसंधान करके एक नई तकनीक विकसित की थी। जिससे दाल की उपलब्धि एंव गुणवत्ता पहले की तुलना में अधिक बढ़ गयी। पर्यावरण अनुकूल मशीनों का निर्माण कार्य के अनुसंधान में स्विटज़रलैण्ड से तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने गृह जनपद में विकसित कर प्रोसेसिंग को स्वाचालित बनाकर मानव श्रम को भी कम किया।


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