कैलाशनाथ राना (NNI Coverage)
जरवल/कैसरगंज, बहराइच (उ0प्र0)। श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की तैयारियां एक दिन पूर्व से शुरू हो गई। पर्व में प्रयुक्त होने वाले
सामग्रियों की खरीदारी के साथ विघ्न विनाशक श्रीगणेश के पूजन की तैयारियां की जा रही है। जरवल टाऊन में गुड़, तिल, गंजी आदि से बाजार गुलजार बना हुआ है। यहां लोगो ने मंहगाई की फिक्र छोड़ दी है, खूब खरीदारी कर रहें हैं। बृहस्पतिवार को पर्व मनाने में महिलाओं के साथ सभी में उत्साह दिख रहा है।
माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी, माघी चतुर्थी या तिल चौथ के नाम से जाता है। वर्ष भर में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी में यह सबसे बड़ी चतुर्थी माना गई है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य की दृष्टि से श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन माताएं संतान के दीर्घायु की प्रार्थना करती है और चंद्र दर्शन कर दूसरे दिन पंचमी में पारण करती है। श्री गणेश चतुर्थी के दिन श्री विध्नहर्ता की पूजा- अर्चना और व्रत करने से व्यक्ति के समस्त संकट दूर होते है। पं.सन्तोष शास्त्री ने बताया कि माघ माह में गणेश चतुर्थी वीरवार के दिन रहेगी।अपनी संतान की दीर्घ आयु के लिए माताए व्रत रखती है और अपने पुत्र के उज्वल भविष्य की कामना करती है यह व्रत सम्पूर्ण सुखों को देने वाला होता है । संवाददाता कैलाश नाथ राना ने पंडित जमुना प्रसाद से जानकारी ली तो उन्होंने बताया, कि चतुर्थी के दिन गणेश भगवान का जन्म हुआ था इसी उपलक्ष्य में व्रत मनाया जाता है एक समय रात्रि को चंद्र उदय होने के पश्चात फलाहार करना उत्तम रहता है। रात में चन्द्र को अर्ध्य देकर गणेश चतुर्थी का उपवास जो जन पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ करता है, उस जन की बुद्धि और ऋषि-सिद्धि की प्राप्ति होने के साथ-साथ जीवन में आने वाली विध्न बाधाओं का भी नाश होता है। पूजन का शुभ मुहूर्त रात्रि 9बजकर 10मिनट पर है।
जरवल/कैसरगंज, बहराइच (उ0प्र0)। श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की तैयारियां एक दिन पूर्व से शुरू हो गई। पर्व में प्रयुक्त होने वाले
सामग्रियों की खरीदारी के साथ विघ्न विनाशक श्रीगणेश के पूजन की तैयारियां की जा रही है। जरवल टाऊन में गुड़, तिल, गंजी आदि से बाजार गुलजार बना हुआ है। यहां लोगो ने मंहगाई की फिक्र छोड़ दी है, खूब खरीदारी कर रहें हैं। बृहस्पतिवार को पर्व मनाने में महिलाओं के साथ सभी में उत्साह दिख रहा है।
माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी, माघी चतुर्थी या तिल चौथ के नाम से जाता है। वर्ष भर में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी में यह सबसे बड़ी चतुर्थी माना गई है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना सुख-सौभाग्य की दृष्टि से श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन माताएं संतान के दीर्घायु की प्रार्थना करती है और चंद्र दर्शन कर दूसरे दिन पंचमी में पारण करती है। श्री गणेश चतुर्थी के दिन श्री विध्नहर्ता की पूजा- अर्चना और व्रत करने से व्यक्ति के समस्त संकट दूर होते है। पं.सन्तोष शास्त्री ने बताया कि माघ माह में गणेश चतुर्थी वीरवार के दिन रहेगी।अपनी संतान की दीर्घ आयु के लिए माताए व्रत रखती है और अपने पुत्र के उज्वल भविष्य की कामना करती है यह व्रत सम्पूर्ण सुखों को देने वाला होता है । संवाददाता कैलाश नाथ राना ने पंडित जमुना प्रसाद से जानकारी ली तो उन्होंने बताया, कि चतुर्थी के दिन गणेश भगवान का जन्म हुआ था इसी उपलक्ष्य में व्रत मनाया जाता है एक समय रात्रि को चंद्र उदय होने के पश्चात फलाहार करना उत्तम रहता है। रात में चन्द्र को अर्ध्य देकर गणेश चतुर्थी का उपवास जो जन पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ करता है, उस जन की बुद्धि और ऋषि-सिद्धि की प्राप्ति होने के साथ-साथ जीवन में आने वाली विध्न बाधाओं का भी नाश होता है। पूजन का शुभ मुहूर्त रात्रि 9बजकर 10मिनट पर है।



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