अभिषेक शर्मा/अखिलेश श्रीवास्तव (NNI Coverage)
बहराइच, उ0प्र0। जिला हॉस्पिटल की व्यवस्था स्ट्रेचर पर पहुच चुकी है। तीमारदारों को कोई भी व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। अपने गोद मे व कंधे पर बीमारों को ले जाते हैं। तीमारदारों का कहना कि हर सुविधा के लिए धन की मांग की जा रही है। यहाँ तक कि बेड के नाम पर 300 रुपये की मांग होती है और दवाएं बाहर की लिखी जाती है, जनऔषधि केंद्र में दलालों की मारामारी है, फिर भी सरकारी योजनाओं को मुह चिढ़ाते हुये हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है कि हम हर संभव मरीजों की मदद कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि इस कदर अगर लापरवाही होगी तो आमजन की सुरक्षा कैसे होगी?
बहराइच, उ0प्र0। जिला हॉस्पिटल की व्यवस्था स्ट्रेचर पर पहुच चुकी है। तीमारदारों को कोई भी व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। अपने गोद मे व कंधे पर बीमारों को ले जाते हैं। तीमारदारों का कहना कि हर सुविधा के लिए धन की मांग की जा रही है। यहाँ तक कि बेड के नाम पर 300 रुपये की मांग होती है और दवाएं बाहर की लिखी जाती है, जनऔषधि केंद्र में दलालों की मारामारी है, फिर भी सरकारी योजनाओं को मुह चिढ़ाते हुये हॉस्पिटल प्रशासन का कहना है कि हम हर संभव मरीजों की मदद कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि इस कदर अगर लापरवाही होगी तो आमजन की सुरक्षा कैसे होगी?



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