दीपक पटेल (NNI Coverage)
मिहींपुरवा, बहराइच (उ0प्र0)। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर श्री बूढ़ेश्वर नाथ मंदिर मे हजारो की संख्या मे लोगों ने जलाभिषेक किया। मौनी अमावस्या के पर्व पै दूर दूर से श्रद्धालुओं का आवागमन रहा लोगो का कहना है को इस मंदिर को बहुत महानता है। अमावस्या के पर्व में भक्त द्वारा मानी गयी मनौती की पूर्ति होने पर भक्त अपनी जीभ काट कर भगवान शिव को समर्पित करते है फिर भक्त को जलाभिषेक के नीर के समीप लेटाया जाता है फिर भगवान शिव को होने वाला जलाभिषेक का जल भक्त की जीभ को जैसे जैसे छूता है वैसे वैसे भक्त को जीभ पुनः पहले जैसे हो जाती है ये करिश्मा भगवान के प्रति लोगो की आस्था को और मजबूत करता है यह वाक्य कोई कहानी या वाक्य नही है आज भी बहुत से भक्त ऐसा करते है मंदिर प्रांगड़ मैं उपस्थित पंडितो से पूछा गया कि मंदिर का इतिहास क्या है तो बताया गया कि इस मंदिर की शिव लिंग को स्थापित नही किया गया था ये लिंग प्राचीन काल जब भारत मे अंग्रजो का शाशन था तब एक जंगल मे ये लिंग अपने आप निकली थी जंगल मे घास छिलने वाले जाते थे जब वो लोग इस पै अपना औजार साफ करते थे तो इस लिंग से खून निकलता था इसके बाद अंग्रजी शाशन काल मे मैं अंग्रजो ने इस लिंग का अस्तित्व हटाने की बहुत कोशिश की मगर नाकामयाब रहे तब से लोगो के प्रति इस लिंग के लिए आस्था बढ़ने लगी लोगो का कहना है कि संसार मे इस तरह की लिँग कही भी नही है जहाँ भगवान शिव के साच्छात प्रमाण है ये करिश्मा आज भी भगवान शिव के इस मंदिर मे आज भी होता है मगर अति पिछड़ा छेत्र होने के अभाव से ये मंदिर प्रचलित नही हो पाया है। NNI कवरेज की यह पड़ताल एक सराहनीये कार्य है यह मंदिर जनपद बहराइच के तहसील मोतीपुर ग्राम पण्डितपुरवा के समीप है।
मिहींपुरवा, बहराइच (उ0प्र0)। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर श्री बूढ़ेश्वर नाथ मंदिर मे हजारो की संख्या मे लोगों ने जलाभिषेक किया। मौनी अमावस्या के पर्व पै दूर दूर से श्रद्धालुओं का आवागमन रहा लोगो का कहना है को इस मंदिर को बहुत महानता है। अमावस्या के पर्व में भक्त द्वारा मानी गयी मनौती की पूर्ति होने पर भक्त अपनी जीभ काट कर भगवान शिव को समर्पित करते है फिर भक्त को जलाभिषेक के नीर के समीप लेटाया जाता है फिर भगवान शिव को होने वाला जलाभिषेक का जल भक्त की जीभ को जैसे जैसे छूता है वैसे वैसे भक्त को जीभ पुनः पहले जैसे हो जाती है ये करिश्मा भगवान के प्रति लोगो की आस्था को और मजबूत करता है यह वाक्य कोई कहानी या वाक्य नही है आज भी बहुत से भक्त ऐसा करते है मंदिर प्रांगड़ मैं उपस्थित पंडितो से पूछा गया कि मंदिर का इतिहास क्या है तो बताया गया कि इस मंदिर की शिव लिंग को स्थापित नही किया गया था ये लिंग प्राचीन काल जब भारत मे अंग्रजो का शाशन था तब एक जंगल मे ये लिंग अपने आप निकली थी जंगल मे घास छिलने वाले जाते थे जब वो लोग इस पै अपना औजार साफ करते थे तो इस लिंग से खून निकलता था इसके बाद अंग्रजी शाशन काल मे मैं अंग्रजो ने इस लिंग का अस्तित्व हटाने की बहुत कोशिश की मगर नाकामयाब रहे तब से लोगो के प्रति इस लिंग के लिए आस्था बढ़ने लगी लोगो का कहना है कि संसार मे इस तरह की लिँग कही भी नही है जहाँ भगवान शिव के साच्छात प्रमाण है ये करिश्मा आज भी भगवान शिव के इस मंदिर मे आज भी होता है मगर अति पिछड़ा छेत्र होने के अभाव से ये मंदिर प्रचलित नही हो पाया है। NNI कवरेज की यह पड़ताल एक सराहनीये कार्य है यह मंदिर जनपद बहराइच के तहसील मोतीपुर ग्राम पण्डितपुरवा के समीप है।


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