Friday, March 8, 2019

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : मध्यस्थता से सुलझाएं अयोध्या विवाद

एजेंसी (NNI Coverage) 

नई दिल्ली/भारत। आज 8 मार्च को अयोध्या भूमि विवाद में मध्यस्थता को लेकर थोड़ी देर में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का आदेश दिया। SC ने जस्टिस इब्राहिम खफीउल्लाह और रविशंकर को मध्यस्थ बनाया। राम मंदिर में 3 मध्यस्थों की टीम गठित की गई है। पैनल को 4 हफ्तों में रिपोर्ट सौंपनी हैं।
इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद मध्यस्थता के लिए नाम सुझाने को कहा था। सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा कि इस मामले में मध्यस्थता के लिए एक पैनल का गठन होना चाहिए। हिंदू महासभा मध्यस्थता के खिलाफ है। निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए राजी है। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ही तय करे कि बातचीत कैसे हो। अयोध्या मामले में 90 हजार पन्नों की गवाही इकट्ठी की गई है। ये 90 हजार पन्नें अलग-अलग भाषाओं में है जिसमें अरबी, संस्कृत, फारसी जैसी भाषाओं में ये गवाही है। इसे इंग्लिस में ट्रांसलेट करके सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया है। 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह अगली सुनवाई में यह फैसला करेंगे। इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए या नहीं। सरकार ने रिट पिटीशन दायर कर विवादित जमीन को छोड़कर बाकी जमीन यथास्थिति हटाने की मांग की है। उन्होंने इस जमीन को राम जन्मभूमि न्यास को लौटाने को कहा है। सरकार ने कोर्ट से कहा है कि विवाद सिर्फ 0.313 एकड़ जमीन पर ही है। बाकी जमीन पर कोई विवाद नहीं है। लिहाजा इस पर यथास्थिति बरकरार रखने की जरूरत नहीं है।
1993 में केंद्र सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण एक्ट के तहत विवादित स्थल समेत आस पास की करीब 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी पर यथास्थिति बनाए रखने की बात कही थी। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच मंगलवार को सुनवाई करने वाली थी। लेकिन जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर जाने के कारण सुनवाई टल गई थी।

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