युसुफ अंसारी/इशितयाक अली (NNI Coverage संवाददाता)
लखीमपुर खीरी, उ0प्र0। सीजी मूलर के अनुसार सामायिक ज्ञान का व्यवसाय ही पत्रकारिता है इसमें तथ्यों की प्राप्ति उनका मूल्यांकन एवं ठीक-ठाक प्रस्तुतीकरण होता है भारत के स्वाधीनता आंदोलन में पत्रकारिता की मुख्ख् भूमिका रही है ,भारतेंदु हरिश्चंद्र भारत जननी में कटु शब्दों में अंग्रेजों की नीति की आलोचना की, वही प्रताप नारायण मिश्रा ने अपने पत्र " ब्राह्मण " में बालकृष्ण भट्ट ने "हिंदी प्रदीप बालमुकुंद गुप्ता ने "शिव शंभू "के लेखों में भारत देश के प्रति होने वाले अत्याचारों और आर्थिक शोषण से ग्रस्त जनता के आक्रोश को पत्रकारिता के माध्यम से मुखरित किया, मैथिलीशरण गुप्त, मखन लाल चतुर्वेदी, महावीर प्रसाद द्विवेदी .प्रेमचंद इत्यादि ने भी स्मरणीय योगदान दिया वहीं मालवीय जी ,तिलक , गांधीजी ने नवजीवन, बालकृष्ण नवीन ने प्रताप के माध्यम से राष्ट्रीय संघर्ष में योगदान दिया अकबर इलाहाबादी ने क्या खूब कहा है" खींचो ना कमा नो को न तलवार निकालो.. जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो" (पत्रकारिता एक जन सेवा है)। पत्रकारिता के आदर्श प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक अपने उसी रूप में हैं समाज में परिवर्तन हुए आविष्कार हुए परंतु इसके आदर्श एवं उद्देश में कोई परिवर्तन नहीं आया ...( पत्रकार का असली अर्थ क्या है) वास्तव में पत्रकारिता शब्द अंग्रेजी शब्द जनरल लिस्ट का अनुवाद है जो फ्रेंच शब्द जर्नल से उपजा है इस शब्द का उद्भव लैटिन शब्द द यू रन लिस से हुआ जिसका अर्थ है दैनिक रोम में सदियों पहले प्रकाशित होने वाला पत्र एक्टा डायना दुनिया का पहला अखबार माना जाता है बाद के दौर में अखबार की परिभाषा के तहत पर्चे से लेकर गजट तक और न्यूज़ शीट से लेकर पत्र तक आने लगे खबर लिखने वाले न्यूज़ राइडर कहे गए बाद में जर्नलिस्ट शब्द सामने आया भारत में मुगल साम्राज्य के दौरान (वाक्या न वीस) था जो गुप्त रूप से साम्राज्य में घटे घटनाक्रम एकत्र करता था और उनका नियमित ब्यौरा प्रस्तुत करता था. सरकारी गजट की तरह प्रस्तुत यह वाक्य सम्राट के सामने पढ़े जाते थे ब्रिटिश साम्राज्य में भी यह पद्धति अंग्रेजों ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल की और (इन फॉर्मर) के जरिए अपने खुफिया सूत्रों का जाल फैलाया मेरे विचार से पत्रकारिता व्यक्ति केंद्रित ना होकर मुद्दा पर केंद्रित होना चाहिए तभी हम पत्रकारिता के आदर्श और उद्देश्य को पूर्ण कर पाएंगे, कोई छोटा या बड़ा पत्रकार नहीं होता बात चाहे उन पत्रकारों की हो जो किसी बड़े न्यूज़ चैनल का न्यूज़ एंकर हो या कोई छोटे गांव कस्बे का समाचार पत्र का संवाददाता हो दोनों का उद्देश्य एक ही होता है जनता तक समाचार को पहुंचाना मुद्दों में फर्क हो सकता है। (आज के समय में पत्रकारिता के तीन मुख्य कार्य है) पहला सूचना प्रदान करना दूसरा शिक्षा और तीसरा मनोरंजन करना इसके अलावा पत्रकारिता का सबसे प्रमुख कार्य लोकतंत्र की रक्षा करना इसी वजह से पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार इसका सजग पहरेदार यदि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तो यह पत्रकार का अधिकार और कर्तव्य है कि वो कार्यपालिका न्यायपालिका विधायिका लोकतंत्र से इन 3 खंभों को जज कर सके , जनता और सरकार और के बीच पत्रकारिता को महत्वपूर्ण कड़ी कहा जाता है क्योंकि समाचार पत्र और पत्रिकाएं किसी भी मुल्क के नीति निर्धारण एवं उसे मूर्ति रूप देने वाला एक शक्तिशाली माध्यम है। भारत के स्वाधीनता आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले पत्रकार आज भी इस लोकतंत्र को जीवित रखने में अपनी सार्थक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन यह एक बहुत बड़ा सत्य है कि आज के मौजूदा वक्त में पत्रकारिता दिनों दिन कठिन होती जा रही है आज समाज में जैसे-जैसे अत्याचार ,भ्रष्टाचार, संप्रदायवाद, आतंकवाद जैसे अपराध बढ़ रहे हैं पत्रकारों पर हमले की घटनाएं आम सी बात हो गई है। गौरी लंकेश जैसी महिला पत्रकार जो संप्रदायिक ताकतों के खिलाफ हमेशा अपनी आवाज बुलंद करती रही हैं उनके साथ क्या हुआ यह हम सब जानते हैं शुजात बुखारी जो आतंकवाद के खिलाफ हमेशा अपनी कलम से लड़ते रहे उनके साथ भी क्या हुआ यह भी सभी को भली-भांति पता है देश में आज पत्रकारों से संबंधित कई संगठन मौजूद हैं परंतु इसके बावजूद भी आए दिन हम और आप लोग पत्रकारों को डराने और धमकाने की खबरें सुनते और पढ़ते रहते हैं, मैं किसी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े नहीं कर रहा परंतु यह घटनाएं क्यों हो रही हैं ? सुलगता हुआ सवाल आज भी हमारे सामने खड़ा (मैं सरकार से यही अपील करूंगा) इस कलम के सिपाही : पत्रकारों की सुरक्षा लिए संसद में जल्द से जल्द एक ऐसा कानून बनाएं जिससे पत्रकार भयमुक्त होकर अपना कार्य कर सकें क्योंकि एक स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र तभी बन पाता है जब उसकी पत्रकारिता भय मुक्त हो।

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