Wednesday, June 12, 2019

मुख्यमंत्री ने अफसरों को दिया निर्देश, जरूरतमंद को मिले प्रधानमंत्री आवास

ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव (NNI Coverage उपसंपादक)
लखनऊ, उ0प्र0। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को सरकार और रफ्तार देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवासों के निर्माण को गति देकर समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति के साथ ही निर्देश दिए हैं कि हर जरूरतमंद को प्रधानमंत्री आवास मिले। शहरों में हो रहे अवैध निर्माणों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के कार्यकलापों की समीक्षा करने लिए मुख्यमंत्री ने मंगलवार को लोकभवन में बैठक बुलाई थी। बैठक में अधिकारियों ने विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। अधिकारियों ने बताया कि कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या, आजमगढ़ और झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के 26,178 लाभार्थियों की सूची सत्यापन के लिए सूडा और डूडा को सौंपी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों के बेहतर विकास के लिए प्राधिकरण रुचि लेकर कार्य करें और अवैध निर्माणों को चिह्नित कर कार्रवाई करें।
             इसके अलावा अधिकारियों ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजना, ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम, अमृत योजना के अंतर्गत नगरों का जीआइएस आधारित मास्टर प्लान, लैंड पूलिंग योजना, भू उपयोग परिवर्तन आदि की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में आवास एवं शहरी नियोजन राज्यमंत्री सुरेश पासी, विभागीय प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक एएचपी के तहत प्रस्तावित संशोधन को भी मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दे दी है। इसके तहत ईडब्ल्यूएस आवासीय इकाइयों का क्षेत्रफल न्यूनतम कारपेट एरिया 22.77 से 30 वर्ग मीटर के मध्य और अधिकतम भवन मूल्य 4.50 लाख रुपये होगा। वहीं, न्यूनतम कारपेट एरिया 29 से 30 वर्ग मीटर वाले ईडब्ल्यूएस आवासीय इकाइयों का अधिकतम मूल्य 6.50 लाख रुपये होगा। इसमें न्यूनतम 4.5 वर्गमीटर की बालकनी भी होगी।मुख्यमंत्री ने कानपुर, आगरा, मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद मेट्रो रेल परियोजनाओं की डीपीआर की प्रगति जानी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मेट्रो के बजाए अब रोप-वे का उपयोग किए जाने के निर्देश दिए।

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