Tuesday, June 18, 2019

लीची खाने से जा रही बच्चों की जान, इस तरह करें मिलावटी लीची की पहचान

अमित श्रीवास्तव (NNI Coverage राज्य ब्यूरो)
पटना/बिहार : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चमकी बुखार से मरने वालों बच्चों की तादाद 100 पार तक पहुंच चुकी है. चमकी बुखार की वजह लीची खाना बताया जा रहा है. वैसे आजकल खाने पीने की वस्तुओं में मिलावट होना आम बात हो गई है।
          ऐसे में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या वास्तव में चमकी नाम का ये बुखार खाली पेट अधिक लीची खाने से हो रहा है या मिलावटी लीची का सेवन करने से। सब्जी और फलों में मिलावट आपकी सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में सेहत के इस दुश्मन से अपने बच्चों और परिवार को बचाने के लिए आप ये ख़ास उपाय अपना सकते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने रोजमर्रा के खाने पीने की वस्तुओं में मिलावट का पता लगाने के लिए एक मैनुअल जारी किया है. डिटेक्ट एडल्ट्रेशन विद रैपिड टेस्ट (डीएआरटी) नाम की इस पुस्तक में कई सरल परीक्षणों द्वारा बताया गया है कि आप कैसे आसानी से खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच कर सकते हैं। आपको बता दें कि मार्केट में लाल लीची की मांग हमेशा बनी रहती है. ऐसे में कुछ लोग हरे रंग की या बासी लीची को ऊंचे दामों पर बेचने के लिए उस पर लाल कैमिकल कलर लगा देते हैं. डॉक्टर्स की मानें तो ऐसे कैमिकल रंग वाली लीची खाने से ना केवल आपकी सेहत खराब हो सकती है, बल्कि आप कैंसर के भी शिकार हो सकते हैं. ऐसे में लीची खाने से पहले उसे पानी में डाल कर देखें. अगर पानी का रंग बदल जाता है तो समझ लीजिए कि लीची में मिलावट है।

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