श्रीमती आर लक्ष्मी (GMC : NNI Coverage)
नई दिल्ली/भारत। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार 1 हफ्ते से पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों की चल रही हड़ताल खत्म हो गई है। जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है। ये फैसला सोमवार को राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जूनियर डॉक्टरों की मुलाकात के बाद लिया गया है। ममता बनर्जी ने डॉक्टरों की सारी मांगों माना ली है जिसमें डॉक्टरों की सुरक्षा अहम है। डॉक्टरों की मांग थी की वो मुख्यमंत्री से मीडिया के सामने ही बात करेंगे। इस मांग को भी ममता बनर्जी ने मान ली थी। देश भर के डॉक्टरों ने बंगाल में हुए उनके खिलाफ हिंसा के बाद हड़ताल करना शुरु कर दिया था। जिसके बाद देश भर में मरीजों को ठीक समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा था। डॉक्टरों की मांग थी की सरकार उनकी सुरक्षा का इंतजाम करें। मामला बढ़ने के बाज ममता सरकार पर दवाब बढ़ने लग गया था जिसके बाद ममता बनर्जी ने अपने एक मंत्री को भी डॉक्टरों से मिलने के लिए भेजा लेकिन वो बात करने पर तैयार नहीं हुए। डॉक्टरों की मांग थी की ममता बनर्जी खुद बात करने की पहल करें और उनकी सुरक्षा का इंतजाम करें जिससे भविष्य में ऐसी घटना फिर से न हो।
क्या था मामला…
ये मामला तब शुरु हुआ जब बंगाल के NRS मेडिकल कॉलेज में पिछले सोमवार को इलाज के दौरान 85 वर्षीय एक वृद्ध की मौ’त हो जाती है उसके बाद स्थिति नियं’त्रण से बाहर हो जाती है। मृ’तक के परिवार ने अस्पताल में तो’ड़-फोड़ शुरु कर दी थी। डॉक्टरों का कहना है कि मृ’तक पहले से ही ह्रदय रोग से पीड़ित था। हमने बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन हम बचा नहीं पाए। इसके बाद कई डॉक्टरों के साथ मा’रपीट की गई। जिसके बाद मेडिकल एसोसिएशन ने हड़ताल पर जाने का फैसला कर लिया। राज्य के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए जिससे राज्य में मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने हंगामा कर रहे लोगों पर साथी डॉक्टरों को बुरी तरह पी’टने का आ’रोप लगाया और बताया कि एक डॉक्टर सर पर चोट लगने के कारण कोमा में चले गए हैं। जिनके ठीक होने की कम उम्मीद है। ठीक होने के बावजूद उनके ताउम्र दिमागी मरीज बने रहने की आशंका है। महिला डॉक्टरों को रे’प और ह’त्या तक की धमकियां मिल रही है।

No comments:
Post a Comment