ब्रहमपाल सिंह यादव (NNI Coverage मण्डल ब्यूरो)
पीलीभीत (उ०प्र०)। तहसील कलीनगर क्षेत्र जमुनियां खास गांव के निकट जंगल से लगा हुआ प्राचीन ओड़ाझार शिवमंदिर है, जिसके कुछ ही दूरी पर पश्चिम दिशा में खन्नौत नदी का उदगम स्थल बेलताल है,उसी से लगा हुआ दशकों पुराना एक मिट्टी का काफी ऊंचा टीला भी है।
पूर्वज बताते हैं अंग्रेजी हकूमत के समय से ओड़ाझार का धार्मिक स्थाल चला आ रहा है,जब राजा शाही शासन आया उस बक्त रानीजमुनावती की पुत्र वधु रानी सुंदर कुँवर की हकूमत के चलते गायों व अन्य पशुओं को पानी पीने के लिए उदगम स्थल के करीब एक बड़ा तालाब की खुदाई का कार्य कराया गया उसी दौरान तालाब से एक शिवलिंग निकली जिसकी लंबाई पांच फिट की थी,उसी शिवलिंग को गांव जमुनियां के मठ मंदिर जोकि रानीसुन्दर कुँवर ने बनवाया था उस पर ले जाकर स्थापना कराने के अखत प्रयास किए गए लेकिन शिवलिंग को वहाँ से लाने में नाकाम रहे,बाद में शिवलिंग को ओड़ाझार में लाकर उसकी स्थापना कर दी गई,शिवलिंग पांच फिट नीचे जमीन के अंदर तक है,पवित्र धाम शिवमंदिर ओड़ाझार पर हर बर्ष चैत के माह में विशाल मेला लगता है,महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवभक्त रात में यहां ठहर कर जगराते करते एवं माह की हर अमावस्या पर भी दूर दूर से चलकर से श्रद्धालु अपनी अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते है,सावन के पवित्र माह में श्रद्धालुओं का दिन भर आवागमन रहता है, सोमवार को शिवभक्त सुबह से ही जलाभिषेक कर बेलपत्री भांग धतूरा, दूध आदि चढ़ावे का प्रसाद शिवलिंग पर चढ़ाकर पूजा अर्चना करके भगवान शिव को मना कर अपनी मनोकामना को पूर्ण करते है।
बाबा बीरबल ने बताया कि- रानी सुंदर कुँवर ने गायों के पानी पीने के लिए तालाब खुद वाया था जिसमें 5 फिट से ज्यादा लंबी शिवलिंग निकली थी जिसको गांव के मठ मंदिर पर ले जाने का काफी प्रयास किया गया लेकिन बाद में उसकी ओड़ाझार पर स्थापना कर दी गई बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर है जो मनोकामना भक्त करते हैं पूर्ण होती है। महंत बाबा राम सिंह ने बताया कि-चैत माह में ओड़ाझार शिवमंदिर पर विशाल मेला लगता है दूर दूर से शिवभक्त मनोकामनाएं लेकर आते हैं, इस समय सावन के पवित्र माह में सोमवार को शिवभक्तों ने आकर जलाभिषेक कर पूजा अर्चना का सिलसिला चल रहा है।
"ओड़ाझार शिवमंदिर पर बने कुआँ की विशेषता"
ओड़ाझार शिवमंदिर पर मंदिर के करीब में बना कुआँ बर्षो पुराना है, गांव जमुनियां में अब से लगभग चार पीढ़ी पहले एक बढई जाति के मिढई लाल रहते थे,बर्षो बीतने के बाद उकने कोई संतान की प्राप्ति नही हुई,तभी उन्होंने संतान प्राप्ति होने के उपरांत ओड़ाझार पर कुआँ बनबाने का संकल्प लिया,जिससे कुछ समय के समय बीतने के बाद उनकी पत्नी को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिनका नाम चोखेलाल रखा गया था,जिसके बाद उन्होंने ओड़ाझार शिवमंदिर पर कुआँ खुदवाया था।जो कि आज भी आस्था का प्रतीक बना हुआ है। उनका परिवार के आज भी जमुनियां खास गांव में राजेन्द्र प्रसाद निवास करते है।
राजेन्द्र प्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि-हमारे पूर्वज रहे मिढ़ई लाल ने संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने पर ओड़ाझार पर कुआँ खुदवाया था,आज हम उनके ही परिवार से चौथी पीढ़ी से है परिवार सहित जमुनियां में रहते है।




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