Tuesday, August 27, 2019

साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने पर मुकदमा दर्ज, धारा 370 का था विरोध

ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव (NNI Coverage न्यूज एंकर)
उत्तरप्रदेश के जनपद बहराइच में देश द्रोह जैसा मामला सामने आया है। थाना कैसरगंज के ग्राम सैदापुर, विजयपुर तहसील कैसरगंज जनपद बहराइच के निवासी अब्दुल कलीम अंसारी उर्फ गुड्डू पुत्र अब्दुल हकीम अंसारी ने सोशल मीडिया पर सौहार्द बिगाड़ने वाला एक वीडियो क्लिप वायरल किया था। जिसमें अब्दुल कलीम अंसारी उर्फ गुड्डू द्वारा भारतवंशियों को भद्दी भद्दी गालियां दी जा रही हैं और धारा 370 का समर्थन कर उत्तेजक बातें कहीं जा रही हैं जो कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला था। उक्त वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं कैसरगंज व उसके आसपास के जागरूक लोगों ने उस क्लिप में उक्त व्यक्ति को पहचान कर उसके खिलाफ स्थानीय थाने में देशद्रोह लगाने व उचित दंडात्मक कार्रवाई करने की माॅग को लेकर एक प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर थाना प्रभारी कैसरगंज संजय कुमार सिंह पूरी घटना को संज्ञान में लेते हुए धारा 153 A IPC,  295 A IPC,  298 IPC, 507 IPC व  66 IPC के तहत कैसरगंज थाने में अभियोग पंजीकृत कर लिया है।
       अपने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में सदस्य ग्राम पंचायत बाल कुमार मौर्या ने कहा कि इस प्रकार का बयान देश विरोधी है और शासन, प्रशासन व संविधान में विश्वास न रखते हुए संविधान के प्रति अवहेलना करने वाला है। जिसके लिए इस तरीके के लोगों के विरूद्ध कड़ी से कड़ी दण्डात्मक कार्यवाही की आवश्यकता है जिससे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति को रोकथाम की हो सके एवं इस प्रकार के देश व समाज विरोधी विचारधारा पर पूर्णतयः अंकुश लगे।  सदस्य पंचायत बार कुमार मौर्या ने शासन स्तर पर भी शिकायत करने और इनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
लिखे गये मुकदमे की धाराओं के क्या है मतलब व क्या है दण्डात्मक प्रावधान ?
*क्या है आखिर धारा 153 A IPC*
 धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना।
*लागू अपराध*
1. विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन।
सजा - तीन वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
2. पूजा के स्थान आदि पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन।
सजा - पाँच वर्ष कारावास + आर्थिक दण्ड।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
*क्या है आखिर धारा 295 A IPC*
यदि कोई व्यक्ति जानबूझ कर दुर्भावनापूर्ण विचार रखते हुए, भारत के नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से कोई लिखित रूप से, उच्चारण से, चित्र द्वारा, संकेतों द्वारा या किसी भी अन्य माध्यम से उस वर्ग के धार्मिक विश्वास का अपमान करेगा या अपमान करने की कोशिश करेगा तो वह इस धारा के अंतर्गत अपराधी माना जाएगा।
*लागू अपराध*
इस धारा के अंतर्गत अपराधी के खिलाफ अपराध सिद्ध होने पर तीन साल तक की सजा या आर्थिक दंड के रूप में जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है या फिर सजा व् जुर्माना दोनों से दण्डित किया जा सकता है। यह एक संज्ञेय अपराध है यानि कि cognizable offence है और एक गैर जमानती अपराध यानि कि Non-Bailable offence है।
*क्या है आखिर धारा 298 IPC*
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सविचार आशय से शब्द उच्चारित करना आदि। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सविचार आशय से उसकी श्रवणगोचरता में कोई शब्द उच्चारित या कोई ध्वनि करना या उसकी दृष्टिगोचरता में कोई संकेत करना।
सजा : एक वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों।
यह एक गैर-जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
*क्या है आखिर धारा 507 IPC*
अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास।
सजा : धारा 506 में उपबन्धित दण्ड के अतिरिक्त दो वर्ष कारावास। यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह समझौता करने योग्य नहीं है।
*क्या है आखिर धारा 66 IPC* 
जुर्माना न देने पर किस भांति का कारावास दिया जाए।
विवरण : वह कारावास, जिसे न्यायालय जुर्माना देने में चूक होने की दशा के लिए अधिरोपित करे, ऐसी किसी भांति का होगा, जिससे अपराधी को उस अपराध के लिए दंडित किया जा सकता था।

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