ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव (NNI Coverage News Anchor)
"वाहन की गलत बनावट"
लखनऊ, उ0प्र0। व्हीकल संशोधन बिल 2019 बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया। बिल पेश करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकार किया कि देश में पिछले पांच सालों में सड़क हादसों में बढ़ोतरी के चलते होने वाली मौतों की वजह से सड़क सुरक्षा के मौजूदा कानूनों में बदलाव करना जरूरी है। इससे पहले ये बिल 23 जुलाई को लोकसभा में पास हो चुका है।
"मौजूदा कानून फेल"
बुधवार को बिल पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सदन में संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि 30 साल पुराना मौजूदा कानून सड़क हादसों को रोकने और परिवहन प्रक्रिया को सुचारू बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।
"राज्यों के अधिकार में दखल देने का इरादा नहीं"
बिल पेश करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकार किया कि देश में पिछले पांच सालों में सड़क हादसों में बढ़ोतरी के चलते होने वाली मौतों की वजह से सड़क सुरक्षा के मौजूदा कानूनों में बदलाव करना जरूरी है। राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गडकरी ने स्पष्ट किया कि सरकार का मोटर यान संशोधन विधेयक के माध्यम से राज्यों के अधिकार में दखल देने का कोई इरादा नहीं है। इसके प्रावधानों को लागू करना राज्यों की मर्जी पर निर्भर है और केंद्र की कोशिश राज्यों के साथ सहयोग करने, परिवहन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाने और दुर्घटनाओं को कम करने की है। इससे पहले लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने राज्यों के अधिकारों को लेकर आपत्ति जताई थी। विपक्षी दलों ने सरकार ने आग्रह किया था कि राज्यों के परिवहन सेवाओं से जुड़े अधिकारों में केंद्र सरकार की कोई दखलंदाजी न हो। उनका तर्क था कि राज्यों को विश्वास में लिए बिना कोई कानून बनाया जाएगा, तो इसका प्रभावी क्रियान्वयन कैसे होगा क्योंकि प्रवर्तन एजेंसियां तो राज्यों की होती हैं।
"संशोधित विधेयक में कई कड़े प्रावधान"
बुधवार को बिल पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सदन में संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि 30 साल पुराना मौजूदा कानून सड़क हादसों को रोकने और परिवहन प्रक्रिया को सुचारू बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। इसमें संशोधन की दो साल से चल रही कोशिशों का जिक्र करते हुये गडकरी ने बताया कि इस विधेयक को स्थायी समिति और प्रवर समिति में विस्तृत चर्चा के बाद पेश किया गया है। विधेयक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के मकसद से काफी कठोर प्रावधान रखे गये हैं। किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना लाइसेंस, खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, निर्धारित सीमा से तेज गाड़ी चलाना और निर्धारित मानकों से अधिक लोगों को बैठाकर अथवा अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसमें एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर भी जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है ।
"विपक्ष ने कहा त्रुतिपूर्ण है विधेयक"
हालांकि चर्चा के दौरान कर्नाटक कांग्रेस के नेता बीके हरिप्रसाद ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुये उच्च सदन में पेश किये गये विधेयक को त्रुटिपूर्ण बताया और कहा कि यह विधेयक लोकसभा में पेश किये गये विधेयक से भिन्न है। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ प्रावधान जोड़े गये हैं, जिनका जिक्र लोकसभा में पेश विधेयक में नहीं था। हरिप्रसाद ने नियमों का हवाला देते हुये सभापति एम वेंकैया नायडू से मांग की कि दोनों सदनों में एक समान विधेयक पेश किया जाना चाहिये, इसलिये सरकार विधेयक की त्रुटियों को दूर करने के बाद ही इसे पेश करे। जिस पर सभापति ने कहा कि विधेयक पेश किया जा चुका है, इसलिये वह हरिप्रसाद के उठाये गये मुद्दे पर विस्तार से विचार कर बाद में व्यवस्था देंगे।
"भ्रष्टाचार के चलते करना पड़ा संशोधन"
वहीं सदन में सभापति की अनुमति के बाद गडकरी ने विधेयक के मुख्य प्रावधानों का जिक्र करने से पहले कांग्रेस सदस्य की चिंता को खारिज करते हुए बताया कि उन्होंने वही विधेयक पेश किया है जो लोकसभा में पारित किया गया है। गडकरी का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था से लोगों को बहुत असुविधाएं हो रही हैं। भ्रष्टाचार की भी बहुत शिकायतें आई हैं। ऐसे में इस संशोधन विधेयक की जरूरत पड़ी।
"बच्चों के लिए"
पुराना एक्ट बच्चों की सुरक्षा पर भी मौन है, लेकिन नए एक्ट के सेक्शन 194-बी के तहत चार साल से बड़े बच्चें के लिए कार में सीट बेल्ट अनिवार्य कर दी गई है।अगर ऐसा नहीं होता है तो वाहन मालिक पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना होगा।वह बच्चा दुपहिया वाहन पर बैठा है तो उसे हेलमेट पहनाना होगा।
"रिकॉल ऑफ व्हीकल"
मौजूदा एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि तय समय से पहले केंद्र सरकार पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करने वाली गाडियों को वापस बुला सकती है।अर्थात उन्हें सम्बंधित कम्पनी में वापस भिजवा सकती है।अब नए एक्ट के सेक्शन 110 ए और 110 बी में प्रावधान कर केद्र सरकार को रिकॉल ऑफ व्हीकल की पावर दे दी गई है।
"गलत रोड इंजीनियरिंग की जवाबदेही"
फिलहाल रोड इंजीनियरिंग की वजह से अगर कोई हादसा होता है तो सीधे तौर पर इसके लिए संबंधित ठेकेदार या कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।नए एक्ट में ऐसे केस के तहत सम्बंधित एजेंसी या ठेकेदार पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।
"बच्चों के हाथ में वाहन देना"
मौजूदा एक्ट में एक हजार रुपये का जुर्माना और तीन माह तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन नए एक्ट के सेक्शन-199 ए के तहत कसूरवार पर 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन साल तक की सजा का नियम बना दिया गया है।इसके अलावा नाबालिग के खिलाफ भी जुवेनाइन जस्टिस एक्ट के तहत एक्शन लिया जाएगा।
"हिट एंड रन"
ऐसे केस में यदि पीड़ित घायल है तो आरोपी वाहन चालक पर 12500 और पीड़ित की मौत होने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना होता है।नए एक्ट में क्रमशः यह राशि पचास हजार और दो लाख रुपये रखी गई है। साल 2018 में हिट एंड रन के करीब 55 हजार मामले सामने आए थे, जिनमें 22 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई है।
"रेसिंग करने पर"
अभी पांच सौ रुपये और नए एक्ट में पांच हजार।
"सीट बेल्ट"
अभी सौ रुपये, नए एक्ट में एक हजार।
"हेलमेट"
अभी सौ रुपये और नए एक्ट में एक हजार।
"बिना इंश्योरेंश"
मौजूदा एक्ट में एक हजार रुपये नए एक्ट में दो हजार।
"बिना डीएल"
अभी पांच सौ रुपये और नए एक्ट में पांच हजार। अयोग्य ठहराने के बाद भी ड्राइविंग करते पकड़े गए तो दस हजार रुपये का चालान होगा, जबकि अभी यह राशि पांच सौ रुपये है।
"वाहन की गलत बनावट"
अभी ऐसा कोई प्रावधान है ही नहीं कि वाहन की गलत बनावट के चलते हादसा हो जाए और संबंधित कंपनी पर जुर्माना हो।नए एक्ट में यह प्रावधान शामिल है।यदि सुरक्षा के मापदंड पूरे नहीं होते हैं तो डीलर पर एक लाख और निर्मामा पर सौ करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
"ओवर स्पीड"
अभी चार सौ रुपये और नए एक्ट में दो से चार हजार रुपये प्रस्तावित किया गया है।
"खतरनाक ड्राइविंग"
अभी एक हजार और नए एक्ट में पांच हजार रुपये।
"ड्रंकन ड्राइविंग"
अभी दो हजार और नए एक्ट में दस हजार रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। जेल की सज़ा का भी प्रावधान है।

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