ब्रहमपाल सिंह यादव (NNI Coverage मण्डल ब्यूरो)
हजारा, पीलीभीत/बरेली मण्डल (उ0प्र0)। एक ओर भारत सरकार देश को और गांव को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से गरीबों को शौचालय देकर खुले में हो रही गंदगी को रोकना चाहती है ताकि प्रदूषण पर अंकुश लगाया जा सके साथ ही प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से भी लोगों को बचाया जा सके लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण सरकार के इस मंसूबे को किस तरह से ना काम करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसका उदाहरण जनपद पीलीभीत की तहसील पूरनपुर के ट्रांस शारदा पार हजारा थाना क्षेत्र के गांव रामनगर का मजरा बहादुर नगर है जहां के लाभार्थी राधेश्याम, कलावती संतलाल रामचंद्र लीलावती और दिलीप कुमार आदि ग्रामीणों ने गांव के प्रधान जवाहर लाल पर शौचालय बनाने के लिए दी जाने वाली सरकारी धनराशि को गबन करने का आरोप लगाया है ग्रामीणों का कहना है की डेढ़ साल पूर्व शौचालय का पैसा खाते मे आया था जिसे प्रधान ने ले लिया काफी मिन्नतें करने के बाद डेढ़ साल बाद घटिया क्वालिटी की पीली ईट दे दिया है जिससे शौचालय बनते ही गिरने लगा है और हादसा होने की आशंका सता रही है और तो और शौचालय भी आधा अधूरा ही बना है और जिसके कारण बाहर खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड रहा है । तब जाकर ग्राम प्रधान ने लाभार्थियों को शौचालय बनवाने के लिए घटिया क्वालिटी के पीली ईट दे दी जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया तो प्रधान ने कहा कि यही ईट है बनवाना है तो बनवा लो ₹12000 में क्या चाहिए जो बन रहा है बनवा लो। आरोप है कि प्रधान और विभाग की मिलीभगत के चलते ऐसे भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसके चलते हैं भ्रष्टाचार दिन दूना रात चौगुना बढ़ता जा रहा है और सरकारी योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

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