Monday, September 30, 2019

हाईकोर्ट में विचाराधीन प्रकरण के बावजूद ताला तोड़कर कब्जा

राशिद अली (NNI Coverage ब्लॉक संवाददाता)
बलहा/बहराइच, उ0प्र0। जनपद के नानपारा कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला किला कवाबची गली में एक दुकान का प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है उच्च न्यायालय में मुकदमा खुद दुकान मालिक रसूल अहमद पुत्र छोटे मियां ने किरायेदार लियाक़त अली को किरायेदारी से बेदखल करने के लिए किया था मुकदमा ज़िला मजिस्ट्रेट के साथ ही उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है इसके बावजूद भी विगत 12/13सितम्बर की रात्रि को दुकान मालिक ने उक्त दुकान का ताला तोड़कर उसमे रखा लगभग 3 लाख रुपए के सामान के साथ दुकान पर कब्ज़ा कर लिया है दुकान का ताला तोड़ते हुए दो लोगों ने क्रमशः मोहम्मद शाहिद खान पुत्र अली हसन, जमीर अहमद पुत्र इक़बाल अहमद ने देखा था जब इन लोगों ने इसकी सूचना किरायेदार लियाक़त अली को दी तो लियाक़त अली ने 14 सितम्बर को स्थानीय कोतवाली प्रभारी को एक पार्थना पत्र देकर कार्यवाही की मांग की थी मगर पुलिस ने कोई जब कार्यवाही नहीं की तो पीड़ित पुलिस क्षेत्राधिकारी नानपारा से मिलकर प्राथना पत्र दिया मगर उसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई तो इसकी शिकायत पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक बहराइच से की और मुख्यमंत्री के साथ ही पुलिस महानिदेशक यूपी ,ग्रह सचिव,डी आई जी देवीपाटन मंडल से भी की मगर उसके बाद भी कोतवाली पुलिस ने कोई भी कार्यवाही नहीं की तब पीड़ित ने गृह सचिव उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही आई जी लोक शिकायत को पार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई मगर फिर भी कोतवाली पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है कल दिनाक 27 सितम्बर को राजा बाजार चौकी प्रभारी चंद्रपाल ने पीड़ित और दोषी दोनों पक्षों को कोतवाली बुलवाया और पीड़ित व्यक्ति पर ही दबाव बनाने की कोशिश की उन्होंने पीड़ित व्यक्ति से कहा कि तुमने जो तहरीर दी है उसको बदलकर दूसरी तहरीर दो रसूल अहमद,और सलमान अंसारी का नाम उसमे से निकाल दो और फिर 107/16 में दोनों पक्षो पर मुकदमा दर्ज करने की बात कही पीड़ित लियाक़त अली ने बताया कि एक तो कोर्ट के आदेश का उल्घंन करके दुकान मालिक ने जबरन कब्ज़ा कर लिया और लगभग 3 लाख रुपये का सामान भी चोरी कर लिया है और पुलिस उलटे उन्हें ही फर्जी फ़साने की बात करती है कोतवाली पुलिस नानपारा किसी भी उचच अधिकारियों का आदेश नहीं मान रही है उल्टे उनके ऊपर ही दबाव बनाया जा रहा है और दोषी व्यक्तियों का नाम तहरीर से बाहर करने की बात कर रही है अब सवाल यह पैदा होता है कि लगभग सभी उच्च अधिकारियों को पार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई जा चुकी है अब पीड़ित व्यक्ति को न्याय कौन देगा।

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