Wednesday, October 30, 2019

रामफल मन्दिर में कायस्थ समाज द्वारा चित्रगुप्त पूजन संपन्न

सरफराज अहमद सिद्दीकी(NNi Coverage नगर संवाददाता)
नानपारा नगर, बहराइच (उ0प्र0)। नगर के रामफल मंदिर सहित कई मंदिरों और घरों में चित्रगुप्त महाराज की पूजा विधि विधान के साथ सम्पन्न हुई । पूजा में तमाम कायस्थ समाज के लोग सम्मिलित हुए “कलम की पूजा होती क्यो है” जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छुट जाने से नाराज भगवान् चित्रगुप्त ने रख दी थी कलम उस समय परेवा काल शुरू हो चुका था। 

परेवा के दिन कायस्थ समाज कलम का प्रयोग नहीं करते हैं यानी किसी भी तरह का का हिसाब - किताब नही करते है आखिर ऐसा क्यूँ है? कि पूरी दुनिया में कायस्थ समाज के लोग दीपावली के दिन पूजन के  बाद कलम रख देते है और फिर  यमदुतिये के दिन कलम-दवात के पूजन के बाद ही उसे उठाते है। इसको लेकर सर्वसमाज में कई सवाल अक्सर लोग कायस्थों से करते है। ऐसे में अपने ही इतिहास से अनभिग्य कायस्थ युवा पीढ़ी इसका कोई समुचित उत्तर नहीं दे पाती है। जब इसकी खोज की गई तो इससे सम्बंधित एक बहुत रोचक घटना का संदर्भ हमें किवदंतियों में मिला। कहते है जब भगवान् राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राजसिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राज्यतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दीं ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवी देवता आ गए तब भगवान् राम ने अपने अनुज भरत से पूछा भगवान चित्रगुप्त नहीं दिखाई दे रहे है इस पर जब खोज बीन हुई तो पता चला की गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त को निमंत्रण पहुंचाया ही नहीं था जिसके चलते भगवान् चित्रगुप्त नहीं आये, इधर भगवान् चित्रगुप्त सब जान चुके थे और इसे प्रभु राम की महिमा समझ रहे थे। फलस्वरूप उन्होंने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर किनारे रख दिया सभी देवी देवता जैसे ही राजतिलक से लौटे तो पाया की स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गये थे, प्राणियों का लेखा जोखा ना लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था की किसको कहाँ भेजे तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने अयोध्या में भगवान् विष्णु द्वारा स्थापित भगवान चित्रगुप्त के मंदिर में गुरु वशिष्ठ के साथ जाकर भगवान चित्रगुप्त की स्तुति की और गुरु वशिष्ठ की गलती के लिए क्षमा याचना की, जिसके बाद भगवान राम के आग्रह मानकर भगवान चित्रगुप्त ने लगभग ४ पहर (२४ घंटे बाद ) पुनः ’कलम दवात की पूजा करने के पश्चात उसको उठाया और प्राणियों का लेखा जोखा लिखने का कार्य आरम्भ किया। कहते तभी से कायस्थ दीपावली की पूजा के पश्चात कलम को रख देते हैं और ’रुयमदुतिये के दिन भगवान चित्रगुप्त का विधिवत् कलम दवात पूजन करके ही कलम को धारण करते है।

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