Friday, January 3, 2020

"चोट पत्थर की सही फिर भी दुआ देते रहे" : काशमी

सरफराज अहमद सिद्दीकी (NNI Coverage नगर संवाददाता)
नानपारा नगर, बहराइच (उ0प्र0)। अन्जुमन शाहकार-ए-उर्दू उत्तर प्रदेश की जानिब से अन्जुमन के अध्यक्ष शायर व अदीब शारिक रब्बानी के नानपारा स्थित आवास पर दिल्ली से आये मशहूर शायर “समर नूरपूरी” के सम्मान में एक शेरी नशिस्त (काव्य गोष्ठी) का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता शारिक रब्बानी ने और संचालन इन्कलाब अशरफी ने किया। नशिस्त में पढ़े गये चुनिंदा अशआर इस तरह है - 
अमानत उल्ला काशमी ने कहां  "चोट पत्थर की सही फिर भी दुआ देते रहे, ऐसा आया न कोई और न आने वाला है।" शारिफ रब्बानी ने कहा "ज़मी पे र हके वह देखेगा आसमा कैसे, हमेशा गरदिशे दौरा का जो शिकार रहे।" समर नूरपुरी ने कहा  "सोचता हूँ देखकर नेज़ो पे मज़लूमो के सर, क्या मेरा हिन्दोस्ता भी करबला हो जायेगा।" इन्कलाब अशरफी ने कहा  "मेरा कुछ कर नही सके से ज़माने वाले, साहबे गुम्बदे खि़जरा है बचाने वाले।" कैफ रहमानी ने पढ़ा  "ये बदनसीबी कि अपना उन्हे बना न सके, सिला हम अपनी वफ़ाओं का कुछ भी पा न सके।" शम्स नानपारवी ने पढ़ा  "रोदिया मै अपनी र्बबादी का साया देख कर, रेत पर तामीर जब मेरा मका हो जायेगा।" मेराज शिवपुरी ने कहा  "नमरूद को गुरूर ने बरबाद कर दिया, तुमको गुरूर है कि हुकूमत न जायेगी।" इसके अतिरिक्त इस अवसर पर नशिस्त में रोशन जमीर, गौस उमर ने भी अपने कलाम रखे। इस मौके पर तमाम लोग मौजूद थे।

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