Tuesday, February 18, 2020

माननीय उच्च न्यायालय ने तराई क्षेत्र को बर्बाद होने से बचा लिया

असगर अली (NNI Coverage राज्य क्षेत्राधिकारी) उत्तरप्रदेश राज्य। बहराइच से मैलानी का भूभाग तराई क्षेत्र है और सीमावर्ती नेपाल राष्ट्र से जुड़ा हुआ है । क्षेत्र की खास बात यह है कि पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती की जाती है और उसे कस्बों तक ट्रेन के माध्यम से ही लाया जाता है। *नानपारा* से आगे बढ़ने पर *रायबोझा* स्टेशन पड़ता है इस स्टेशन से चार-पांच किलोमीटर दूर तक कोई सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है इस नाते एक बड़ी आबादी इसी स्टेशन पर आश्रित है। इस के बाद *मिहींपुरवा* के पास "परवानी गौढी" नाम की एक विशाल और बेहतरीन साप्ताहिक बाजार लगती है जहां पर किसानों के उपयोग की समस्त दुकानें रविवार के दिन लगती हैं। 
    छोटी लाइन प्रखंड की रेल  असगर अली(राज्यअधिकारी)
"मिहीपुरवा" बाजार भी है ब्लॉक भी है, तहसील भी है एवं इस तराई क्षेत्र का केन्द्र भी | एक बड़ी आबादी उत्तर में गोपिया बैराज से लेकर सर्रा कला, मटेही कला तक इसी स्टेशन के सहारे हैं। इसी तरह *"ककरहा रेलवे स्टेशन"* के पास चुरवा, गौरा-पिपरा की ओर और गंगापुर मंडी, अमृतपुर पुरैना जाने का रास्ता है। "मुर्तिहा" से रोज हजारों लोग नेपाल के प्रसिद्ध कस्बे गुलरिहा से जुड़ते हैं | यही से उतर कर के लोग विश्व प्रसिद्ध सैयद हाशिम अली शाह उर्फ लक्कड़ शाह बाबा की मजार पर जाते हैं ।
इसी तरह *"निशान गाढा"* स्टेशन से नेपाल में ताराताल की ओर एक बड़ी आबादी आती जाती है तो दूसरी ओर रमपुरवा-मटेही से सुजौली तक शार्टकट रास्ते से लोग आते-जाते हैं। "बिछिया"* रेलवे स्टेशन की तो बात ही अलग है । नेपाल से लेकर वन क्षेत्र की 15 ग्राम पंचायतों का आवागमन केन्द्र बिछिया  ही है जो वनांचल की पुरानी बाजारों में से एक है । जनपद बहराइच के गजेटियर में 1908 की बाजारों की लिस्ट में बिछिया का नाम सम्मान पूर्वक लिखा हुआ है जिसमें इस बात का भी उल्लेख है कि बाजार से 1700000 रुपए का निर्यात और ₹1000000 का आयात हुआ है । यहां से कतर्निया घाट, कोठिया घाट और धनोरा घाट होकर नेपाल जाया जा सकता है यहां से उतरकर सुजौली तथा गिरजापुरी बैराज पर लोग आते-जाते रहते हैं । थारू बाहुल्य आम्बा, बर्दिया, फकीरपुरी, विशुनापुर आदि गांव इसी स्टेशन से ही जुड़ते हैं।
आगे बढ़ने पर *"मझरा स्टेशन"* मिलता है जहां से एक बहुत बड़ी आबादी इस स्टेशन से आती-जाती है तथा यहां से दूर-दूर तक मछलियों का व्यापार भी होता है। *"खैरटिया"* के लोगों का तो एक मात्र साधन ही ट्रेन है। यहां पर कौड़ियाला घाट से नेपाल के राजापुर और टीकापुर के रास्ते जुड़ते हैं। यहां पर सिखों तथा अन्य धर्मों के लोगों का प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री कौड़ियाला साहब मौजूद है जहां प्रत्येक अमावस एवं पूर्णमासी को हजारों लोग पहुंचते हैं। थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर *"तिकुनिया"* रेलवे स्टेशन है ।इस स्टेशन से बनवीर पुर होकर खकरोला के रास्ते नेपाल के टीकापुर लमकी तक के लोग इसी ट्रेन का उपयोग करते हैं साथ ही तिकोनिया के दक्षिण में निवासरत एक बडी आबादी के आवागमन का एकमात्र साधन तिकुनिया रेलवे ही है ।
यहां से आगे बढ़ने पर *"बेलरायां"* रेलवे स्टेशन है इस रेलवे स्टेशन पर उत्तर की ओर बेला-परसुआ समेत तमाम गांव हैं जो जंगल की गोद में बसे हुए हैं और दक्षिण में निघासन की ओर से बहुत सारे गांव हैं जो ट्रेन के माध्यम से ही विभिन्न स्थानों पर पहुंचते हैं। आगे दुधवा के जंगल में *"सोनारी पुर"* रेलवे स्टेशन है जिसको वन विभाग कानूनों ने वीरान कर दिया है। *"दुधवा"* रेलवे स्टेशन तो है लेकिन यहाँ से दुधवा पर्यटन क्षेत्र में पहुंचना बहुत कठिन है । कोई साधन मौजूद नहीं है | हां, इस रेलवे स्टेशन से जंगल के रास्ते पैदल चलकर के सूरमा, पोया, पुरैना, बरबटा, धुसकिया  चंदन चौकी ,सौनहा, बंदर भरारी आदि 42 थारू जनजाति बाहुल्य गांव में लोग जाते रहते हैं।
मिनी पंजाब के नाम से जाने जाने वाला *"पलिया"* 12 किलोमीटर आगे है। पलिया का व्यवसायिक आधार ट्रेन है तथा पर्यटकों के लिए दुधवा नेशनल पार्क तक पहुंचने के लिए पलिया रेलवे स्टेशन ही एक प्रमुख केन्द्र है। *भीरा* रेलवे स्टेशन से मैलानी और मैलानी से नानपारा तक पूर्वांचल  के  मूल निवासियों के सैकड़ों गांव है जो कभी बनकटिया मजदूर के रूप में  लाकर  बसाए गए थे। यहां के कई लाख लोग गोरखपुर, बलिया, देवरिया, आजमगढ़  बिहार एवं देश के विभिन्न प्रांतों में जाने के लिए लोग निरंतर रेल सेवा का उपयोग करते हैं। गरीबी का मार झेल रहे मजदूर ट्रेनों के माध्यम से देश के विभिन्न भागों में पहुंचते हैं जब ट्रेन बंद हुई तो ट्रेन का असली महत्व समझ में आया ।
वन क्षेत्र के बच्चों के पढ़ाई के लिए ट्रेनों की भूमिका देखी जा सकती है जिसके माध्यम से हजारों बच्चे रोज अपने स्कूलों तक पहुंचते हैं । सब्जी, फल आदि बेचने तथा पूर्णागिरि की यात्रा करने एवं गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर जाने वाले इसी ट्रेन का सहारा लेते है। जागरूक जनता ने अपना अधिकार हाईकोर्ट के रास्ते हासिल कर लिया अब जनता जनप्रतिनिधियों से यह अपील करती है कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा इस मार्ग पर पूर्व की समय सारणी अनुसार ट्रेनों का संचालन नियमित रूप से कराने का आदेश रेलवे बोर्ड से पारित कराकर जनता के खाये हुए नमक का हक अदा करें। माननीय उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद आम जनता में जान वापस लौट आई है । इस फैसले को अंजाम तक पहुंचाने वाले उन सभी लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने संघर्ष में साथ दिया। उन सभी विद्वान वकीलों का बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने अदालत में बड़े ही अच्छे तरीके से जनता की बात रखी । उन सभी पत्रकारों का बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने इस मुद्दे को जीवंत बनाये रखा और एक बड़ी एवं ऐतिहासिक पूर्वजों की अर्जित कमाई तथा विरासत को खोने से बचा लिया।

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