राशिद अली (NNI Coverage ग्राम्य संवाददाता)
बहराइच (उ0प्र0)। प्रधानमंत्री शहरी आवास आवंटन में सुर्ख़ियों में रहे नगर पालिका परिषद नानपारा के अधिशाषी अधिकारी अशोक कुमार तिवारी पुनः एक बार चर्चा का विषय बन गए हैं शासन प्रसासन के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए नगर पालिका परिषद के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन करने वाले सफाई कर्मियों और पालिका कर्मियों को इन्होंने नियम कानून को ताक पर रख कर पूर्ण रूप से समर्थन दिया यहाँ तक कि खुद कर्मचारियों संग अपने पद की गरिमा को अनदेखा करते हुए कोतवाली तक मुकदमा दर्ज कराने भी पहुँच गये सफाई कर्मियों के विवाद को इन्होंने अपना निजी विवाद समझ लिया बताते चलें कि कल दिनाक 29-3-2020 को पालिका में ठेकेदारी पर सफाई कर्मी का कार्य करने वाले रमेश बाल्मीकि पुत्र छोटे लाल का कुछ विवाद नगर के वार्ड नं 13 निवासी इस्तियाक पुत्र जुनैद से हो गया था सफाई कर्मी का आरोप था कि इस्तियाक ने अपने 4 साथियों संग मिलकर उसके साथ में मारपीट और गाली गलौज की है यह जानकारी जब सफाई प्रभारी नायक विकास बाल्मीकि को मिली तो वह नगर पालिका परिषद के गेट पर सभी सफाई कर्मियों संग अन्य कर्मियों को इकठा कर प्रदर्सन करने लगे तथा काम को रोक दिया तथा कूड़ा लदी ट्राली आदि वाहनों को लाकर नगर पालिका के गेट पर खड़े कर दिए प्रकरण की जानकारी कर्मचारियों ने पालिका अध्यक्ष अब्दुल मोईद राजू सहित अधिशाषी अधिकारी अशोक कुमार तिवारी को दी तो अध्यक्ष से पूर्व अधिशाषी अधिकारी खुद कर्मचारियों की लड़ाई में कूद पड़े और खुद सफाई कर्मी की तहरीर अपने हाथों में लेकर अपने पद की गरिमा का ख्याल किये बगैर कोतवाली मुकदमा लिखवाने पहुँच गये कोतवाली में जब हमारे संवाददाता ने सफाई कर्मी और सफाई नायक से प्रकरण के बारे बात की तो दोनों लोगों ने बयान दिया कि इस मामले में एओ,अध्यक्ष सहित सभी कर्मचारियों का उनको समर्थन प्राप्त है कोतवाली से निकलने के बाद नगर पालिका परिषद के प्रवेश द्वार पर देखा गया कि सभी कर्मचारी इकठा हैं और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब पुरे भारत में लॉक डाउन कोरोना वायरस को लेकर चल रहा है और किसी भी संग़ठन को धरना प्रदर्शन, रैली आदि करने की परमिशन नहीं है तो किया यह नियम नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों पर लागू नहीं होता है क्या वह प्रदर्शन करने को स्वतंत्र हैं नगर पालिका परिषद पहुँच कर जब हमारे संवाददाता ने इस प्रकरण के बारे में अधिशाषी अधिकारी अशोक कुमार तिवारी का पक्ष जाना तो उनका कहना था कि हमारे सफाई कर्मचारी को मारा पीटा गया है और जब तक मुकदमा नहीं लिखा जायेगा यह काम नहीं करेंगे मुकदमा लिख जाने के बाद यह कर्मचारी काम शुरू करेंगे कोतवाली प्रभारी से वार्ता हो चुकी है मुकदमा दर्ज किया जायेगा वहां से निकल कर संवाददाता प्रकरण स्थल पर गया जिससे विवाद हुआ था इस्तियाक सहित अन्य मोहल्ले वालों से बारे में जानकारी की तो उन लोगों का आरोप था कि सफाई कर्मी ने उसके ऊपर चप्पल उठाई थी और कूड़े की बाल्टी उसके घर में फ़ेंक दी थी सफाई कर्मचारी को किसी ने भी नहीं मारा है खैर बात करते हैं वर्तमान समय की स्थिति पर जब देश में लॉक डाउन दफा 144 लागु है तो क्या अधिशाषी अधिकारी को जानकारी नहीं है कि इस दशा में किसी प्रकार कोई भी प्रदर्शन करने की मनाही है या सबकुछ जानते हुए भी एओ कानून व्यवस्था का उलंघन कर रहे हैं मौके पर देखा गया कि अधिशाषी अधिकारी अपने चेहरे पर मास्क आदि भी नहीं लगाए हुए हैं और न ही प्रदर्शन कर रहे कर्मचिरियों को इससे रोक रहे हैं क्या लॉक डाउन सिर्फ आम जनता के लिए लागू किया गया है नगर पालिका परिषद के कर्मचारी व अधिकारी पर यह नियम लागू नहीं होता है नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी सहित कर्मचारियों ने खुलेआम लॉक डाउन का मखौल उड़ाया है नगर पालिका परिषद कार्यालय में देखा गया कि वहां पर न तो हैण्ड वाश और न ही सेनिटाइजर की कोई व्यवस्था है और न ही नगर क्षेत्र में इस महामारी से बचाओ हेतु कोई व्यवस्था की गई है कुछ वार्डों को अगर छोड़ दिया जाये तो नगर के वार्डों में एक बार भी सेनिटाइजर का छिड़काव नहीं कराया गया है जबकि दो बार हमारे संवाददाता ने खुद अधिशाषी अधिकारी से नगर के वार्डों में सेनिटाइजर का छिड़काव कराये जाने की गुजारिश भी की है मगर ऐसा प्रतीक होता है कि नगर पालिका प्रशासन कोरोना वायरस जैसी गंभीर बीमारी से बचाओ हेतु गंभीर नहीं है और न ही इस संबंध में शासन प्रसासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन कर रही है अब देखना यह है कि कानून तोड़कर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों और उन्हें सह देने वाले अधिशाषी अधिकारी पर शासन प्रसासन क्या कार्यवाही करता है।

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