राशिद अली (NNI Coverage ग्राम्य संवाददाता)
बहराइच, उ0प्र0। मुसलमानों का सबसे पाक महीना रमज़ान जिसका जिक्र आते ही लोगों के अंदर एक अजीब सी ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है कैसा भी मुसलमान हो 11 महीने चाहे अल्लाह की नाफरमानी करता हो मगर इस पाक रमजान माह में सभी गलत कामों को छोड़कर रोज़े और नमाज़ में लग जाता है।
सुब्रात पर्व आते ही मुस्लिम समुदाय के लोगों के दिलो में एक अजीब सी ख़ुशी देखने को मिलती थी कि रमजान का पाक महीना आने वाला है मगर इस वर्ष रमजान महीना तो अपने समय से ही आया मगर मुस्लिम समुदाय में वह ख़ुशी और जोश देखने को नहीं मिला कारण देश में महामारी के रूप में फैला कोरोना वायरस है जिसके कारण पुरे भारत में लॉक डाउन चल रहा है लोगों को घरों में रहने की गुजारिश की गई है और नमाज़ आदि सभी जरुरी फ़रायज़ घरों में ही अदा करने की गुजारिश शासन प्रसासन ने सभी मुस्लिम समुदाय से की है इस कारण न तो मस्जिद में कोई नमाज़ अदा करने जाता है और न ही बाज़ारों में ही कोई रौनक हैं क्योंकि प्रसासन ने दुकाने बंद रखने का आदेश दे रखा है इस कारण चारो तरफ सिर्फ सन्नटा पसरा हुआ है हर वर्ष रमजान आने के हफ़्तों पहले मस्जिदों की रंगाई पुताई साफ सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का काम शुरू हो जाता था बाज़ारों में हर प्रकार के सामानों की दुकानें सजने लगती थी यहाँ तक की बाज़ारों में जगहें की कमी हो जाया करती थी तो नगर में स्थित गांधी पार्क में अस्थाई रूप से दुकाने लग जाती थी हर तरफ चहल पहल और नूर की रौनक देखने को मिलती थी रमजान में चाहे अमीर हो चाहे मिडिल क्लास का हो चाहे गरीब ही क्यों न हो अपनी हैसियत से बढ़कर इस माह में खर्च करता था एक से बढ़कर एक पकवान लोगों के घरों में अफ्तार के समय बनने लगते थे बच्चों में विशेष रूप से उत्साह देखने को मिलता था मस्जिदे तरव्ही के लिए तैयार हो जाती थी नानपारा की चिकवा वाली मस्जिद की तीन दिनों की तरव्ही क़स्बे के साथ ही आस पास के कस्बों में मशहूर थी लोग अन्य कस्बों से भी यह तीन दिन की ताराह्वी पढ़ने को आते थे पुरे नानपारा में चारों तरफ चहल पहल और रौनक भीड़भाड़ देखने को मिलती थी लोगों द्वारा अफ्तार पार्टियों का आयोजन किया जाता था ईशा की नमाज़ के तुरंत बाद ही तरव्ही की तैयारी शुरू हो जाती थी बड़े बुढो के साथ बच्चों में भी काफी उत्साह देखने को मिलता था बाजार में खजूर,बिस्कुट,सेवई,फल ,सब्जी,विभिन्न प्रकार के सर्बतों की दुकानों सहित टोपी,गमछा,आदि कई तरह की दुकाने क़स्बे में सज धज तैयार हो जाया करती थी अफ्तार के बाद कस्बों की होटलों में चाय का दौर शुरू हो जाता था हर तरफ चहल पहल और हर चेहरे पर खुशी देखने को मिलती थी मगर इस बार महामारी के रूप में फैला कोरोना वायरस के कारण मुस्लमान अपने अपने सबसे पाक महीने रमजान को अपने घरों में ही मना रहा है यहाँ तक की नमाज़े भी घरों में अदा कर रहा है क़स्बे की सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है लोग घरों में ही रह कर रमजान को मनाने को मजबूर हैं कही भी किसी तरफ कोई चहल पहल देखने को नहीं मिल रही है लोगों के चेहरों पर एक खौफ बना हुआ है और सभी मुसलमान अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि इस बीमारी से सभी निज़ात दे दें कुल मिलाकर यह रमजान मुसलमानों में ख़ुशी पैदा नहीं कर पाया है।



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