राशिद अली (NNI Coverage ग्राम्य संवाददाता)
बहराइच, उ0प्र0। उत्तर भारत मे बाले मियां के नाम से मशहूर हजरत सैय्यद सालार मसऊद गाज़ी रहमतुल्ला अलैह की दरगाह प्रबंध समिति के सदर सैय्यद शमशाद अहमद एडवोकेट ने कोरोना आलमी बीमारी के मद्देनजर इस साल शब-ए-बरात के मुबारक मौके पर अपने-अपने घरो में इबादत करने और रोज़ा रखने की गुजारिश की है।
उन्होंने कहा है कि शाबान का महीना बहुत ही मुबारक महीना है। यह महीना अल्लाह के महबूब सरकारे दो आलम हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम का महीना है। जिसकी फ़ज़ीलते बड़ी अहम हैं। इस माह की 15वीं रात को अल्लाह ने लैलतुल मुबारका (मुबारक रात) कहा है। लैलतुल कद्र के बाद शाबान की 15वी रात से अफ़ज़ल कोई रात नही है। इस रात अल्लाह आसमाने दुनिया पर नुज़ूल फरमाता है और अपने तमाम बन्दों को बक्श देता है। इस रात खैर और बरकत के दरवाजे खोल दिये जाते है और हक़ तआला रिज़्क़ मांगने वाले को रिज़्क़ और मगफिरत चाहने वालो की मगफिरत कर देता है। इस रात में जागना, दिन को रोज़ा रखना, अस्तग़फ़ार करना, दुआ मांगना, कब्रस्तान जाना और बुजुर्गाने दीन की मज़ारों की ज़ियारत करना और फातिहा पढ़ने का बहुत सवाब है। चूंकि आलमी बीमारी की वजह से लॉक डाउन चल रहा है इसलिए लोगो से गुजारिश है कि वे रोज़ा रखे और अपने-अपने घरो में कसरत से इबादत करे और घरो से ही अपने-अपने बुजुर्गों और बुजुर्गाने दीन के लिए फातिहा पढ़े।

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