Saturday, June 6, 2020

8जून से मस्जिदों में नमाज़ के साथ लाकडाउन का भी करें पालन : मुफ्ती साजिद

असगर अली (NNI Coverage F.O. उ0प्र0)
उत्तरप्रदेश / बरेली मण्डल / पीलीभीत। विश्वभर में फैले करोना वायरस के कारण आज देश सन्कट के दौर से गुजर रहा है। ऐसै में मुस्लिम समुदाय के धर्म गुरू चिंतित हैं। 8 जून से मस्जिदों में नमाज़ को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान अहले सुन्नत रिसर्च सेंटर बरेली के डिवीजनल अध्यक्ष मुस्लिम धर्म गुरू इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने कहा कि मुसलमान मस्जिदों में जाने से पहले इन बातों का ख्याल रखें। सिर्फ फर्ज नमाज ही मस्जिद में अदा करें। सुन्नत और नफ़्ल नमाज घरों में अदा करें। वुजू घर से बनाकर मस्जिद में जायें। सैंट्राइज-मासक लगाकर अपने साथ रूमाल व टोपी लेकर ही मस्जिद जायें। मस्जिद का तौलिया व टोपी का उपयोग बिल्कुल न करें। मस्जिद में पहुंचकर हाथ व पैर धुल लें। कपड़े रोजाना तब्दील करें या साफ रखें। मास्क लगाकर ही घर से निकलें। रास्ते में करीब होकर न चलें। रास्ते में किसी से हाथ न मिलाएं हां सलाम जरूर करें। रोजाना अच्छी तरह गुस्ल करें।मस्जिद में नापाक व बदबूदार चीज लेकर न जायें। जिसके बदन पर नापाकी लगी हो वह मस्जिद में न जाये। मस्जिद के अदब व एहतराम का ख्याल करें। मस्जिद में बच्चों को न लायें। 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग मस्जिद में जाने से परहेज करें। मस्जिदों में बीमार न आयें, बल्कि वह घर पर रहकर ही नमाज अदा करें। कुरआन-ए-पाक की तिलावत घर पर ही करें। नमाज खत्म होने के बाद मस्जिद में बिल्कुल न रुकें। कोरोना महामारी तक मस्जिद के इंस्तिजा खाना (पेशाब खाना) का उपयोग न करें तो बहुत बेहतर है। मस्जिदों में बेवजह न रुकें। फर्ज नमाज हो जाए तो घर जाकर बाकी नमाज अदा करें। मस्जिद में नमाज के वक्त ही पहुंचे। कोरोना वॉयरस के प्रति जागरूक करने के लिए जारी सरकारी एप मोबाइल में डाउनलोड कर लें, कोरोना वॉयरस के प्रति खुद भी सजग रहें व लोगों को भी जागरूक करें। मस्जिद में एक साथ न दाखिल हों बल्कि दूरी बनाकर बारी-बारी दाखिल हों, मस्जिद से निकलते वक्त एक साथ न निकलकर बारी-बारी दूरी बनाकर निकलें। घर से निकलते वक्त हदीस में आयी हुई हिफाजत की दुआ जरूर पढ़कर निकलें।
*मस्जिदों के जिम्मेदार इन बातों का ख्याल रखें*
जब तक कोरोना महामारी है तब तक रोजाना मस्जिदों की साफ-सफाई व धुलाई करवायें। चटाई व कालीन हटा दी जाए। वुजू खाना साफ रखें। ब्लींचिंग पाउडर व फिनायल आदि से साफ करवायें। दवा का छिड़काव करा दें। इस्तिंजा खाना (पेशाब खाना) की जगह साफ रखी जाए। रोजाना दवा छिड़कवायी जाए। हाथ मुंह पोछने के लिए तौलिया न रखी जाए। अगर रखी जाए तो तौलिया रोजाना धुली जाए या दूसरी बदली जाए। कोरोना महामारी तक कोई दीनी जलसा व इज्तिमा न करें। पर्दे वगैरा धुलवा दिए जाएं। दरो-दीवार, खिड़की व दरवाजों की अच्छी तरह साफ-सफाई करवाई जाए। 
*वुजू खाने में साबुन, हैंडवॉश आदि रखवा दिया जाए। खुशबू वगैरा का इंतजाम करें*।
सीढ़िया व छतों को साफ करवा दें। पानी की टंकी साफ करवा दी जाए। मस्जिदों के आसपास गंदगी न होने दें। बराबर सफाई रखें। दवा छिड़कवाएं। एसी व कूलर का उपयोग फिलहाल बिल्कुल न करने दें। हां एसी व कूलर की अच्छी तरह साफ-सफाई जरूर करवा दी जाए। मस्जिदों के बाहर ही जूता चप्पल उचित दूरी बनाकर रखने की व्यवस्था की जाए। मस्जिद के बाहर साफ-सफाई करवाएं। *कादरी दारुल इफ्ता पूरनपुर के काजी व मुफ्ती मौलाना नूर मोहम्मद हसनी कादरी ने कहा कि *हो सके तो सिर्फ चन्द लोग ही मस्जिदों में नमाज़ अदा करें* नालियों में दवा का छिड़काव करें। आसपास पानी, कूड़ा करकट आदि न जमा होने दें। इमाम व मोअज्जिन का हुजरा पूरी तरह से साफ करवा दिया जाए। इमाम व मोअज्जिन की बकाया तनख्वाहें दे दी जाएं। इमाम व मोअज्जिन तक जरूरत का राशन पहुंचा दें। खैरात मांगने वालों को एक साथ इक्ट्ठा न होने दें ब्लकि इनके बीच निश्चित दूरी हो। कोरोना वायरस से बचाव के जागरूकता वाले पोस्टर मस्जिदों के बाहर लगवायें जाएं, सरकार व प्रशासन का सहयोग किया जाए।

No comments:

Post a Comment