सरफराज सिद्दीकी (NNI Coverage नगर संवाददाता)
नानपारा, बहराइच (उ0प्र0)। क़स्बा निवासी युवा समाजसेवी/पत्रकार व पत्रकार कल्याण संघ के ज़िलाध्यक्ष राशिद अली के आवास पर गंगा जमुनी तहज़ीब का बेहतरीन नमुना देखने को मिलता है ज्ञात हो कि पत्रकार के आवास पर हर पर्व को ख़ुशी ख़ुशी मानते हुए देखा जाता है जहाँ इनके घर ईद की खुशियां मनाई जाती है वहीँ होली का पर्व भी मनाया जाता है ईदुल अज़हा(बकरीद) की कुर्बानी होती है तो रक्षा बंधन का पर्व भी मनाया जाता है तो अगर बर्राबिउल्ल अव्वल में मकान को सजाया जाता है तो दीपावली पर्व भी मनाया जाता है ऐसी गंगा जमुनी तहज़ीब का अनूठा संगम इनके आवास पर देखने को मिलता है आज रक्षा बंधन के पर्व पर भी श्री अली की पुत्रियां अरबिया शेख,अन्तशल शेख,अलवीना शेख अपने बड़े भाई काशिम शेख ,तंज़ील के साथ ही अपने रिश्तों के भाइयों को भी राखियां बांधती हैं यह परंपरा इनके यहाँ पर इनकी बड़ी पुत्री के जन्म लेते ही शुरू हो गई है तब से लेकर आज तक यह परम्परा इनके यहाँ पर चलती चली आ रही है पत्रकार राशिद अली ने बताया कि उनके यहाँ पर हिन्दू,मुस्लिम दोनों समुदाय के पर्व कई वर्षों से होते हुए चले आ रहे हैं और उनके बच्चे भी दोनों धर्मों के पर्व बड़ी खुशी के साथ में मनाते हैं।
नानपारा, बहराइच (उ0प्र0)। क़स्बा निवासी युवा समाजसेवी/पत्रकार व पत्रकार कल्याण संघ के ज़िलाध्यक्ष राशिद अली के आवास पर गंगा जमुनी तहज़ीब का बेहतरीन नमुना देखने को मिलता है ज्ञात हो कि पत्रकार के आवास पर हर पर्व को ख़ुशी ख़ुशी मानते हुए देखा जाता है जहाँ इनके घर ईद की खुशियां मनाई जाती है वहीँ होली का पर्व भी मनाया जाता है ईदुल अज़हा(बकरीद) की कुर्बानी होती है तो रक्षा बंधन का पर्व भी मनाया जाता है तो अगर बर्राबिउल्ल अव्वल में मकान को सजाया जाता है तो दीपावली पर्व भी मनाया जाता है ऐसी गंगा जमुनी तहज़ीब का अनूठा संगम इनके आवास पर देखने को मिलता है आज रक्षा बंधन के पर्व पर भी श्री अली की पुत्रियां अरबिया शेख,अन्तशल शेख,अलवीना शेख अपने बड़े भाई काशिम शेख ,तंज़ील के साथ ही अपने रिश्तों के भाइयों को भी राखियां बांधती हैं यह परंपरा इनके यहाँ पर इनकी बड़ी पुत्री के जन्म लेते ही शुरू हो गई है तब से लेकर आज तक यह परम्परा इनके यहाँ पर चलती चली आ रही है पत्रकार राशिद अली ने बताया कि उनके यहाँ पर हिन्दू,मुस्लिम दोनों समुदाय के पर्व कई वर्षों से होते हुए चले आ रहे हैं और उनके बच्चे भी दोनों धर्मों के पर्व बड़ी खुशी के साथ में मनाते हैं।



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