डी०पी०श्रीवास्तव (NNI Coverage न्यूज एंकर)
बहराइच/नानपारा, उ0प्र0। मुहर्रम उल हराम को नवासऐ रसूल हज़रत इमामे हुसैन रजि़अल्लाहु अनहु की शहादत का दिन है आप हज़रत अली और हज़रत फातिमा के बेटे हैं हदीसे पाक में हज़रत इमाम हुसैन की बहुत फजी़लत है हुजूरे पाक सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने फरमाया की ए अल्लाह मैं हुसैन से मोहब्बत करता हूं तू भी इनसे मोहब्बत कर और जो हुसैन से मोहब्बत करें अल्लाह तू भी उनसे मोहब्बत कर दूसरी हदीस में फरमाया की हसन और हुसैन जन्नत के नौजवानों के सरदार होंगे एक और हदीस में आप ने फरमाया की हसन और हुसैन मेरे दुनिया के दो फूल हैं इसी तरीके से हजरत इमाम हुसैन की बहुत सी फज़िलत हदीस में बयान की गई है हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पहले ही बता दिया गया था कि आप के यह दोनों नवासे हज़रत हसन और हज़रत हुसैन को शहीद किया जाएगा। इसीलिए आप दोनों से बहुत मोहब्बत करते थे और तमाम इंसानों को यह तालीम देते थे कि मेरे अहले बैत और हसन और हुसैन से मोहब्बत करना इनको तकलीफ नहीं पहुंचाना क्योंकि जो इनको तकलीफ पहुंचाएगा या कि उसने मुझे तकलीफ पहुंचाई वक़्त गुजरा हज़रत हुसैन बड़े हुए और वक़्त के ज़ालिम जाबिर व फ़ासिक़ यज़ीद से मुकाबला किया यजीद ने अल्लाह को नाराज करके हुकूमत हासिल की वहीं दूसरी तरफ इमामे हुसैन ने अल्लाह को राजी किया कुरान हदीस की तालीम पर अमल किया और अपने नाना जान की हिदायत पर अमल किया और अपने नाना जान की परवरिश कि तुफैल यह बर्दाश्त नहीं किया कि मैं जिंदा रहूं और कुरान हदीस का मज़ाक उड़ाया जाए दुनिया में जुल्मो सितम से काम किया जाए लोगों को ना हक़ क़त्ल किया जाए इसीलिए हज़रत इमाम हुसैन वक़्त के जालिम हाकिम यज़ीद से जंग की ज़ाहिर में जंग तो यज़िद ने जीती और हज़रत इमाम हुसैन शहीद हो गए लेकिन हज़रत हुसैन ने कयामत तक आने वाले इमान वालों के दिल जीत लिए और हज़रत हुसैन की हुकूमत मुसलमानों के दिल पर हो गई यजीद मिट गया कोई नाम लेने वाला नहीं बचा यजी़द की कबर का पता नहीं वहीं दूसरी तरफ लोगों के दिलों में नवासऐ रसूल हज़रत इमाम हुसैन की मोहब्बत लोगों के दिलों में मौजूद है और तमाम अहलेबैत यानी आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान आपकी तमाम बीवियां आपकी तमाम बेटियां और आपके दूसरे तमाम नवासे से आज हर ईमान वाला मोहब्बत करता है जो सच्चाई को मानने वाला होगा वह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घरवालों से मोहब्बत करेगा और आपके साथी यानी सहाबा से भी मोहब्बत करेगा सहाबा और अहलेबैत दोनों से मोहब्बत करना ईमान वाले के लिए जरूरी है अगर किसी एक सहाबी को बुरा भला कहता है तो उसके दिल में ईमान नहीं है इसी तरीके से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के घर वालों में से किसी एक को बुरा भला कहता है तो उसका भी ईमान मुकम्मल नहीं एक मुसलमान के लिए यह ज़रूरी है कि वह सहाबा और अहलेबैत से मोहब्बत रखें।
मेरे दोस्तों कर्बला का सबक यह है और हजरत इमाम हुसैन ने हमें यह सबक दिया है कि वक्त का ज़ालिम बादशाह जितना भी बड़ा हो या जितना भी बड़ा ताकतवर हो खामोश नहीं रहना चाहिए बल्कि अपनी ताकत के बराबर जुल्मों का और जालिम का मुकाबला करना चाहिए कभी भी बुराई का साथ नहीं देना चाहिए कभी भी जुल्म का साथ नहीं देना चाहिए हजरत हुसैन ने कर्बला में जंग के दौरान जोहर की नमाज पढ़ी और कयामत तक आने वाले लोगों को यह पैगाम दिया कि अगर पूरी तारीफ में नमाज माफ होती तो आज माफ होती लेकिन आपने लड़ाई के दौरान भी नमाज पढ़ी और हमें यह पैगाम दिया कि किसी भी हाल में एक मुसलमान नमाज नहीं छोड़ सकता आज हम छोटी मोटी तकलीफ पर नमाज को छोड़ देते हैं और हमें नमाज की पाबंदी की फिक्र नहीं रहती और हम दावा करते हैं कि हम हजरत हुसैन से मोहब्बत करते हैं और हजरत हुसैन ने लड़ाई के दरमियान भी कर्बला के मैदान में नमाज अदा की तो यह हमारे लिए सबक है कि हम नमाज़ की पाबंदी करें ज़ालिम से मुकाबला करें उनके खिलाफ़ आवाज़ उठाएं और तमाम साहाबा व अहले बैठत से मोहब्बत रखें यही पैग़ाम ए कर्बला है और यही पैग़ाम शहादत नवासऐ नवास ए रसूल हजरत इमाम हुसैन रजिअल्लाहु ताआला अनहु है।

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