Wednesday, September 23, 2020

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को बीज के साथ मिली जानकारी

प्रकाश श्रीवास्तव (NNI Coverage मण्डलब्यूरो)

नानपारा/बहराइच/देवीपाटन मण्डल, उ0प्र0। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय फैजाबाद द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र नानपारा पर तिलहन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खाद सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत समूह प्रथम पंक्ति प्रदर्शन तोरिया (लाही) प्रजाति पन्त तोरिया 508 का बीज वितरण किया गया। साथ ही कृषको को प्रशिक्षण भी दिया गया।केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक/अध्यक्ष ने बताया कि क्लस्टर प्रदर्शन हेतु तोरिया (लाही) क्रैच क्राप के रूप मे खरीफ एवं रबी के मध्य में बोयी जाती है। इसकी खेती करके अतिरिक्त लाभ अर्जित किया जा सकता है।इसकी खेती सीमित सिंचाई की दशा में अधिक लाभदायक होती है। प्रशिक्षण में तोरिया का लगाने का समय, बीज की मात्रा, बीज शोधन के लिए 2.5 ग्राम थीरम प्रति किग्रा बीज उपचारित करके बुआई करे यदि थीरम न हो तो मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति किग्रा बीज उपचारित किया जा सकता है ।तोरिया की प्रजाति पन्त तोरिया 508 की फसल 90-95 दिनो में पककर तैयार हो जाती है।इसकी उत्पादन क्षमता 15 से 18 कुन्तल/हेक्टेयर है। एक एकड़ क्षेत्रफल के लिए लगभग 1.5 किग्रा बीज की आवश्यकता होती है। तोरिया की बुआई सितम्बर माह में की जानी चाहिए। इसी के संदर्भ में कृषि विज्ञान केंद्र  केंद्र के वैज्ञानिक डॉ सूर्य बली सिंह ने खाद एवं उर्वरक के बारे मेँ विस्तार से बताया। एक एकड़ में 40किग्रा नत्रजन, 20किग्रा फास्फोरस एवं 20किग्रा पोटाश देना चाहिए। फास्फोरस के जगह सिगंल सुपर फास्फेट का प्रयोग करना चाहिए। बुआई के समय 80किग्रा/एकड़ जिप्सम अवश्य प्रयोग करे। साथ ही 20कुन्तल सड़ी गोबर या कम्पोस्ट की खाद डाले। खरपतवार प्रबन्धन के बारे मेँ विस्तार से बताया गया। प्रत्येक कृषक को तोरिया (लाही) प्रजाति, पन्त तोरिया 508 का बीज वितरण किया गया। साथ ही जिला प्रबन्धक भारतीय फसल बीमा योजना ने फसल बीमा योजना के बारे में जानकारी भी दी।


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