पीयूष पोरवाल (NNI Coverage राजधानी ब्यूरो)
लखनऊ, उ0प्र0। कई दिन से खराब श्रेणी में चल रही लखनऊ की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। 328 वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ लखनऊ वायु प्रदूषण के मामले में देश में तीसरे नंबर पर पहुंच गया। पानीपत 350 व मेरठ 339 एक्यूआई के साथ क्रमश: पहले व दूसरे नंबर पर रहा। लखनऊ की हवा की स्थिति लाल निशान से ऊपर मिली।
लखनऊ में कई दिनों से लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले प्रशासन ने इसे रोकने को कई निर्देश जारी किए थे, दो-तीन दिन कार्रवाई व चेतावनी के शोरगुल के बाद सब शांत हो गया। परिणाम स्वरूप प्रदूषण की स्थिति फिर बिगड़ने लगी। तालकटोरा और लालबाग की हवा कई दिन से बहुत खराब की श्रेणी में है। दोनों जगह एक्यूआई 300 से 350 के बीच रहा। गोमतीनगर की स्थिति अचानक बिगड़ी है। दो दिन पहले यहां सुधरी हुई हवा थी और एक्यूआई 155 था। अचानक यह 228 और फिर मंगलवार को बहुत खराब श्रेणी में 303 पहुंच गया। अलीगंज में हवा की स्थिति कई दिन से खराब श्रेणी में है। जिला प्रशासन के दिए निर्देशों का पालन नहीं। कुछ दिन पहले जिला प्रशासन ने निर्देश दिए थे कि निर्माण कार्य स्थलों पर पानी का छिड़काव कर धूल उड़ने से रोकी जाए। ग्रीन नेट लगाने समेत कई अन्य सावधानियां बरतने को कहा था, लेकिन इसका असर नजर नहीं आ रहा। लालबाग में चल रहे निर्माण कार्य स्थलों व मिट्टी से ढके गड्ढों में धूल उड़ती नजर आई। विशेषग्यों का मानना है कि प्रदूषण बढ़ने के कई कारण हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रो. ध्रु़वसेन सिंह के अनुसार मानवजनित व प्राकृतिक दोनों कारणों से प्रदूषण बढ़ रहा है। लॉकडाउन के बाद न केवल सरकारी व निजी स्तर पर रुके निर्माण कार्य भी शुरू हैं। सावधानी न बरती जाने से हवा में धूल बढ़ रही है। इसके अलावा अनलॉक के बाद वाहनों का आवागमन बढ़ने से फिर हवा बिगड़ रही है। हवा कम चलने और रात में पारा गिरने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है।

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