डी०पी०श्रीवास्तव "अंकुर" (NNI Coverage संपादक)
बहराइच, उ0प्र0। बहराइच जिले के एक मान्यता प्राप्त पत्रकार का बेटा इलाज के अभाव में 10 माह तक तड़पता रहा आखिरकार नवंबर माह के आखिरी दिन उसकी मौत हो गई। इस पत्रकार के बेटे की मौत ने जहां हमारे सिस्टम की कलई खोल दी। वहीं अफसरों की संवेदन शून्यता भी उजागर की। पत्रकार की सहायता की दरकार संबंधी अर्जी लालफीताशाही में कैद हो गई। जांच हुई भी तो वल्दियत बदल गई और इसके पहले कि मुख्यमंत्री तक एक बेबस पत्रकार की आवाज पहुंचती उसके बेटे ने उसकी आंखों के सामने दम तोड़ दिया। पहले बीमारी फिर कोरोना संकट ने आय के सभी स्रोतों को बंद कर दिया। बहराइच शहर के मोहल्ला घसियारीपुरा निवासी दीप प्रकाश श्रीवास्तव एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र में जिला संवाददाता और मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। तीन बेटों और पति-पत्नी मिलाकर दीप प्रकाश का पाँच सदस्यों वाला परिवार खुशहाल जीवन जी रहा था। जनवरी 2020 से दीप के 18 वर्षीय मंझला बेटा स्नेहिल श्रीवास्तव पेट की गंभीर बीमारी से घिर गया। घर की जमा पूंजी स्नेहिल के इलाज में खर्च हो गई। पहले बीमारी फिर कोरोना संकट ने श्रीवास्तव परिवार की आय के सभी स्रोतों को बंद कर दिया। परिवार गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। रिश्तेदारों से कर्ज लेकर दीप प्रकाश बेटे स्नेहिल का इलाज लखनऊ में कराते रहें। अप्रैल आते-आते स्नेहिल के स्वास्थ्य में आंशिक सुधार तो शुरू हुआ मगर इस दौरान कर्ज के पैसे भी इलाज में खर्च हो गए। इलाज के अभाव में बेटे स्नेहिल के हर दिन कुम्हलाते चेहरे ने आखिरकार एक पिता को व्याकुल कर दिया।
4 अप्रैल 2020 को दीप प्रकाश ने जिला अधिकारी कार्यालय को प्रार्थना पत्र देकर डीएम से मदद की गुहार लगाई। कुछ दिन बीतने के बाद भी जब डीएम कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो दीप प्रकाश ने अप्रैल में पुनः एक प्रार्थना पत्र देकर डीएम शंभू कुमार से मदद मांगी मगर डीएम का रिस्पांस तब भी शून्य रहा। दीप प्रकाश मदद की उम्मीद लिए डीएम, एडीएम, एसडीएम ऑफिस के चक्कर लगा रहे थे। स्नेहिल के बचने की आस हर दिन धूमिल होती जा रही थी। तब दीप प्रकाश ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी, इस चिट्ठी पर जवाब देने को बाध्य डीएम शंभू कुमार ने सितंबर महीने में एसडीएम सदर सौरभ गंगवार को जांच करने के आदेश दिए फिर गंगवार साहब ने लेखपाल को आदेश थमा दिया। साहब लोगों ने जांच इतनी गहनता से किया कि दीप प्रकाश की वल्दियत ही गलत लिख दी। जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। बेबस मां के आंसू भी डीएम शंभू कुमार के दिल को नहीं पसीज सके। बीमार स्नेहिल बिना इलाज के महीनों तड़पता रहा। 30 नवंबर 2020 की सुबह स्नेहिल हमेशा के लिए दुनिया से विदा हो गया। सात महीने से बेटे की जीवन की भीख मांग रही एक बेबस मां के आंसू भी डीएम शंभू कुमार के दिल को नहीं पसीज सके। स्नेहिल के मौत के चंद घंटों बाद ही दीप प्रकाश ने शंभू कुमार को मैसेज कर बताया कि उनके बेटे की मौत हो चुकी है। चिकित्सीय मदद तो छोड़िए डीएम दो शब्द श्रद्धांजलि के भी नहीं लिख व बोल सके। यह बहराइच और प्रशासन दोनों का दुर्भाग्य है कि मदद के आभाव में उसका एक मासूम दुनिया से असमय ही विदा हो गया।

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