ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव (NNI Coverage ब्यूरो)
नानपारा/बहराइच, उ0प्र0। दहेज पर मदरसा फैजुल उलूम के मौलाना सालिम कासमी का बयान यह बात खूब अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए के मजंहबे इस्लाम में दहेज व बारात जैसी कोई चीज नहीं है बल्कि दहेज मांगना नाजायज और हराम है आज हमारे मुल्क हिंदुस्तान में शौहर और बीवी के बीच में लड़ाई झगड़े के जो मामले सामने आ रहे हैं लड़कियां अपने ससुराल में जहेज के लिए मारी पीटी जा रही है उनको कतल किया जा रहा है या तो उन लड़कियों पर इतना ज़ुलम कर दिया जाता है कि वो खुदकुशी कर लेती हैं यह सब वह तरीका है जिसको इस्लाम ने बहुत पहले नाजायज और हराम कर दिया था अगर शरीयत के हिसाब से देखा जाये शादी का क्या हुक्म है तो लड़की के बाप के ऊपर किसी भी तरीके का कोई दबाव कोई खर्चा नहीं है ना तो लड़की के बाप के ऊपर जहेज़ देना है और ना ही आने वाली बारात के आदमियों का खाना है और ना ही कोई खर्चा है क्योंकि जब लड़की के बाप ने अपनी लड़की को पोस कर के अट्ठारह 20 साल अपने पास रखा और पूरी जिंदगी के लिए उसको उसके शौहर के हवाले कर दिया अपने जिगर के टुकड़े को जिंदगी भर के लिए दूसरे के हाथ में दे दिया अब इससे ज्यादा उस बेचारे बाप से क्या लिया जाए और क्या उसके ऊपर ज़ोर दिया जाए मजहबे इस्लाम में जहेज़ मांगना हराम है इस्लाम तो यह हुक्म देता है कि बाप अपनी विरासत में लड़कियों को हिस्सा दें आज हम सिर्फ लड़कों को तो हिस्सा देते हैं मगर लड़कियों को हिस्सा नहीं देते और हम बहाना यह बनाते हैं कि लड़कियों का जो हिस्सा था वह हमने दहेज में दे दिया यह गलत और नाजायज बात और बहुत बड़ा गुनाह है इस्लाम में लड़कियों को दहेज ना दे करके विरासत में हिस्सा देना चाहिए और वो लोग जो दहेज मांगते हैं दहेज की शर्त पर शादी करते हैं वो इंतिहाई घटिया और कमीनीमे लोग हैं जो लड़कियों के बाप का खून चूसते हैं उनकी पूरी जिंदगी की कमाई को अपना हिस्सा समझते हैं असल में ऐसे लोग फकीर होते हैं जो खुद तो कुछ कर नहीं सकते दूसरे के माल पर आराम करना चाहते हैं अल्लाह ताला ने हाथ पैर दिए हैं ताकत दी है तुम कमाओ और अपनी जरूरत का सामान अपने कमाए हुए पैसों से हासिल करो ना कि जोर जबरदस्ती से लड़की के बाप से आज जरूरत इस बात की है कि हम समाज में फैली इस बुराई को खत्म करने वाले बने अगर आज हम दूसरी लड़कियों के बाप से जहेज मांगेंगे तो कल हमको भी अपनी लड़कियों को दहेज देना पड़ेगा और हमें भी परेशानी उठानी पड़ेगी मेरी तमाम मुसलमान भाइयों से गुजारिश है के शादी को सादी करें शरीयत के हुकुम के मुताबिक शादी करें हमारे हुजूरे पाक सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया उस निकाह में सबसे ज्यादा बरकत होती है जो आसानी के साथ किया जाता है आज हमें जरूरत है कि हम अपने मुल्क हिंदुस्तान में फैली इस गैर इस्लामी लानत को खत्म करें और निकाह को आसान बनाएं!

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