Sunday, May 16, 2021

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए अच्छी फसल के टिप्स

दिवाकर श्रीवास्तव (NNI Coverage जिलासंवाददाता) 

बहराइच/नानपारा, उ0प्र0। कृषि विज्ञान केंद्र नानपारा के  वैज्ञानिक डॉक्टर बीपी शाही  और वैज्ञानिक सूर्य बली सिंह ने करैला की अच्छी फसल  उगाने के लिए  किसानों को टिप्स दिए। इस समय करैला की फसल की तुडाई की जा रही है।कृषक भाई इस समय हर दुसरे तोडाई के पश्चात जल विलेय उर्वरक  एन पी के 18:18:18 या 19:19:19 का 1किग्रा प्रति एकड के हिसाब से 10-12 टंकी में घोल बनाकर छिड़काव करें जिससे फसल अधिक उत्पादन के फलो अच्छी चमक होगी जिससे बाजार में अच्छी किमत भी मिलती हैं ।इस समय श्यामवर्ण (ऐन्थेक्नोज) यह रोग के लक्षण पतियों एवं फलों पर प्रकट होते है।शुरू में पतियों पर पीले,गोल जलयुक्त धब्बे दिखाई देते हैं ।ये धब्बे आपस में मिलकर बड़े एवं भूरे हो जाते है।फलो पर धब्बे गोलाकार जलयुक्त एवं हल्के रगं के होते है।इसके नियंत्रण हेतु खेत में जगंली पौधो को इकठ्ठा कर नष्ट कर दे।खड़ी फसल में मेन्कोजेब 2ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें ।इस समय करैला में थ्रिप्स कीट प्रकोप हो रहा है ।यह थ्रिप्स पतियों की उपरी सतह एवं अधिक मात्रा में पतियों की निचली सतह पर पाये जाते हैं ।इसके नियंत्रण हेतु फिप्रोनिल 5प्रतिशत एस सी 400मिली प्रति एकड़ या थायोमेथोक्जाम 1ग्राम प्रति 2लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें ।जैविक उपचार के रूप में  बवेरिया बेसियाना 500ग्राम प्रति एकड़ की दर छिड़काव करें ।कुकुम्बर मोजेक विषाणु रोग भी लगता है ।इस रोग के कारण पौधे छोटे रह जाते है तथा ग्रसित पौधो की पतियाँ छोटी, पीले धब्बे दिखाई देते हैं ।पतियाँ सिकुड़ कर मुड़ जाती हैं ।कुछ फोल गुच्छों में दिखाई देते हैं ।इसके नियंत्रण हेतु रोग ग्रसित पौधो को उखाड़ कर जलाना चाहिए व जंगली खरपतवारो को नष्ट कर दे।खड़ी फसल में इमिडाक्लोरोपिड 3-5मिली प्रति 10लीटर पानी दवा का एक सप्ताह के अन्तराल पर खड़ी फसल में दो बार छिड़काव करें जिससे रोग वाहक कीट नष्ट हो जाते है।इस समय फलमक्खी कीट नियंत्रण के लिए 6-7 ट्रैप प्रति एकड के हिसाब से खेत में लगाया जाय।साथ एक कीटनाशक दवा का छिड़काव करें ।गर्मी में 5-6 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करते रहे।


No comments:

Post a Comment