Saturday, July 31, 2021

अरहर बीज उत्पादन कर आत्मनिर्भर बने किसान : डॉ०शाही

ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव (NNI Coverage ब्यूरो/संचालक)

बहराइच/नानपारा, उ0प्र0। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच प्रथम के सभागार में दिनांक 27/7/2021से 30/7/21 चार दिवसीय रोजगार परक प्रशिक्षण विषय_ अरहर बीज उत्पादन तकनीक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ विनायक साही ने की डॉक्टर साही ने अपने उद्बोधन में किसानों को अरहर बीज उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनने के विषय पर विशेष प्रकाश डाला डॉक्टर साही ने जागरूकता के क्रम में किसानों को बताया कि अरहर बीज उत्पादन के अंतर्गत बीज की अनुवांशिक शुद्धता भौतिक शुद्धता एवं अंकुरण क्षमता को बनाए रखने के लिए बीज की बुवाई से लेकर कटाई तक अनेक प्रकार की सावधानियां अपनानी पड़ती हैं भौतिक एवं अनुवांशिक शुद्धता वाला बीज ही भरपूर उत्पादन दे सकता है साथ ही साथ यह भी बताया  कि अरहर की अगेती प्रजातियां टाइप-21, उपास-120, शरद, पारस व मानक की बुवाई जून के मध्य सप्ताह तक कर देनी चाहिए। यह प्रजातियां 130 से 180 दिन में तैयार हो जाती हैं। पिछेती प्रजातियां में नरेंद्र अरहर-1, नरेंद्र अरहर-2, आजाद, एमएएल-6 व बहार हैं। जिनकी बुवाई जुलाई के प्रथम सप्ताह में कर देनी चाहिए यह प्रजातियां 270 से 275 दिन में पक कर तैयार हो जाती हैं। सभी प्रजातियों के लिए बीज की मात्रा 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखनी चाहिए। बीज की बुवाई मेंड़ पर करनी चाहिए, ताकि अधिक वर्षा होने पर फसल नष्ट न हो। अरहर की फसल के लिए 15 किलोग्राम नत्रजन, 40 ग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। प्रशिक्षण में IFFCO कंपनी के एरिया मैनेजर सर्वजीत वर्मा ने किसानों को इफको सागरिका इफको नैनो यूरिया इफको डीएपी उर्वरक के बेहतर प्रभाव अरहर के साथ तक अन्य फसलों पर भी बताया। साथ ही केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह ने अपने व्याख्यान मे फसल लगने वाली बीमारियों व कीटों के बारे में जानकारी दी और मृदा की जांच करने के बाद संतुलित मात्रा में उर्वरक के प्रयोग करने तथा  रोग उपचार हेतु थीरम एवं करबंडाजिम 2:1 के अनुपात में मिलाकर 3 ग्राम प्रति किलोग्राम व ट्राइकोडरमा 4 ग्राम तथा 1 ग्राम का कारबक्सीन का उपयोग। कीट प्रबंधन हेतु प्रथम छिड़काव 15 दिन पश्चात एच एन पी वी का 500 एलःई प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। यंग प्रोफेशनल निकरा परियोजना कुशाग्र सिंह ने इसी क्रम में बीज शोधन की आवश्यकता सिंगल सुपर फास्फेट; एवं गंधक का उपयोग; फली बेधक एवं फली मक्खी का नियंत्रण; फूल आते समय मोनोक्रोटोफॉस का छिड़काव आदि बिंदुओं पर जानकारी दी। यंग प्रोफेशनल  भारती सिंह ने सह  फसली खेती के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण में ग्राम जबदी ब्लाक तेजवापुर के कुल 15 किसानों ने प्रतिभाग किया।



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