अय्यूब अंसारी (NNI Coverage संवाददाता)
बलहा/नानपारा, बहराइच। तहसील अधिवक्ता एसोसिएशन नानपारा के तत्वावधान में गांधी शास्त्री जयंती पर्व का आयोजन धूमधाम से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष जवाहर लाल वर्मा एडवोकेट ने की और संचालन ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया और विधिक तथ्यों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत में महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पार्पण करते हुये दीप प्रज्ज्वलित किया गया। इसके उपरांत ओजस्वी वक्त हरीश शर्मा एडवोकेट ने "रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम" भजन से विचार शुरू किये और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जीवन वृत्तांत सुनाया। उन्होंने बताया कि गांधी जी ने स्वतंत्रता के लिए सदैव सत्य और अहिंसा का मार्ग चुना और आंदोलन किए। गांधीजी ने वकालत की शिक्षा इंग्लैंड में ली थी। वहां से लौटने के बाद बंबई में वकालत शुरू की। वह सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। हम सभी को उनके जीवन व सदमार्गों का अनुसरण करना चाहिए। सुंदर लाल आर्य एडवोकेट ने कहा कि सादा जीवन और उच्च विचार के बलबूते गांधी जी राष्ट्रपिता बन गए और देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। उनके इस कृत्य का देश सदैव ऋणी रहेगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बहराइच के निर्देशन पर ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव एडवोकेट ने विचार व्यक्त करते हुए 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की अपील की और कहा कि महात्मा गांधी ने सभी धर्मों को एक समान मानने, सभी भाषाओं का सम्मान करने, पुरुषों और महिलाओं को बराबर का दर्जा देने और दलितों-गैर दलितों के बीच की युगों से चली आ रही खाई को पाटने पर जोर दिया, उनके जन्मदिन को विश्व भर में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी तरह विनम्र, दृढ, सहिष्णु एवं जबर्दस्त आंतरिक शक्ति वाले लाल बहादुर शास्त्री जी लोगों के बीच ऐसे व्यक्ति बनकर उभरे जिन्होंने लोगों की भावनाओं को समझा। वे दूरदर्शी थे जो प्रधानमंत्री के रूप में नागरिकों की सेवा कर देश को प्रगति के मार्ग पर लेकर आये। उनकी श्वेतक्रान्ति की भावना और जय जवान जय किसान उक्ति को हमें अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
इस दौरान कार्यक्रम में महासचिव निर्मल कुमार श्रीवास्तव, रामादल वर्मा, वेद प्रकाश त्रिपाठी, नुरुल हक मिकरानी, विजय किशोर श्रीवास्तव, गणेश सिंह, दिलीप श्रीवास्तव, रामप्रकाश मौर्य, ओम प्रकाश वर्मा, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, ब्रह्मा प्रसाद पटेल, मुरली मनोहर, वेद प्रकाश श्रीवास्तव, मनीष मिश्रा आदि तमाम अधिवक्ता गण मौजूद रहे।



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