Wednesday, August 10, 2022

बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर, नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री

आराध्या सिंह (NNI Coverage ब्यूरो/प्रतिनिधि) 

नई दिल्ली/बिहार/भारतवर्ष। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ अपना गठबंधन तोड़ा और राज्यपाल को जाकर अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफा देने के बाद वह राबड़ी देवी से मिले, राबड़ी देवी से मिलने के बाद नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री आवास पहुंचे जहां पर महागठबंधन के बैठक हुई और नीतीश कुमार को महागठबंधन का नेता चुना गया। महागठबंधन का नेता चुनने के बाद एक बार फिर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव राज्यपाल से मिलने गए और 164 विधायकों का समर्थन प्राप्त पत्र राज्यपाल को दिया। राज्यपाल फागू चौहान ने नीतीश कुमार को सरकार बनाने का न्योता दिया। शाम 4:00 बजे नीतीश कुमार बिहार में आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री बनेंगे.2020 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू नेता चुनाव लड़ा था और महागठबंधन आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई पार्टी ने साथ चुनाव लड़ा था.2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी लेकिन सरकार नहीं बना पाई थी.जनता दल यूनाइटेड और भाजपा ने मिलकर सरकार बनाई थी जोकि 2 साल चली और उसके बाद नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ   गठबंधन तोड़ा। जेडीयू का एनडीए से गठबंधन तोड़ने के बाद बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जयसवाल ने कहा या बिहार की जनता और भाजपा की सरकार के साथ धोखा है। बिहार विधानसभा में 243 सीटें है जिसमें आरजेडी के पास 79, भाजपा के पास 77, जनता दल यूनाइटेड के पास 45, कांग्रेस के पास 19, हम के पास 4, सीपीआई (M-L) के पास 12, सीपीआई (M)के पास 2, सीपीआई के पास 2, एआईएमआईएम के पास 1 और 1 इंडिपेंडेंट विधायक हैं। 2024 चुनाव से पहले नीतीश कुमार का गठबंधन तोड़ना और आरजेडी के साथ शामिल होना महागठबंधन को कितना मजबूत बनाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन बिहार में भाजपा के लिए राह मुश्किल दिख रही है। बिहार का इतिहास रहा है कि 1990 के बाद से केवल 1995 में एक बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है नहीं तो हर बार वहां  त्रिशंकु विधानसभा बनी है। 1990 से बिहार की राजनीति में यह माना जाता है कि जो भी सरकार बनाता है उसको आरजेडी या जेडीयू में से किसी एक  की जरूरत पड़ती है। तेजस्वी यादव दूसरी बार उपमुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। बिहार की राजनीति में 48 घंटे में  सरकार बदल गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नाराजगी एनडीए से उस वक्त शुरू हुई जब बिहार विधानसभा की शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी आए थे और नीतीश कुमार को बैनर में कहीं जगह नहीं दी गई थी। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में जेडीयू ने एनडीए का समर्थन किया लेकिन नीतीश कुमार ने दिल्ली से दूरी  बनाए  रखी, राष्ट्रपति के विदाई समारोह में एवं नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में भी नीतीश कुमार नहीं पहुंचे। 7 अगस्त को नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। शाम को खबर आई कि नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी से फोन पर बात की है और उनसे मिलने का समय मांगा है। 7 तारीख को ही नीतीश कुमार ने अपने सभी सांसदों और विधायकों को  2 दिनों के अंदर पटना पहुंचने को कहा। बिहार में सियासी हलचल को देखते हुए आरजेडी ने भी अपने विधायकों की बैठक 9 अगस्त मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर बुलाई। जेडीयू ने अपने सांसदों और विधायकों के साथ बैठक की और उसमें नीतीश कुमार ने मीडिया को बताया कि सभी की राय लेने के बाद यह फैसला हुआ कि हमें एनडीए से अपना नाता रिश्ता तोड़ना चाहिए। 2025 में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने और जिस प्रकार भाजपा ने बिहार 2020 विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था उससे देखते हुए यही लगता है कि 2025 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अकेले दम पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगी।


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