Thursday, May 30, 2024

भव भय संताप हर लेता है आदित्य हृदय स्तोत्र : ध्यान प्रकाश

अय्यूब अंसारी (NNI Coverage समाचार सेवा)

"प्रभु श्री राम ने भी आदित्य हृदय स्तोत्र का जाप कर पाया था रावण पर विजय"

नानपारा, बहराइच (उ०प्र०)। नगर में ज्येष्ठ माह के बड़े मंगलवार अवसर पर जगह जगह भजन कीर्तन के धार्मिक कार्यक्रम व भंडारे का आयोजन किया गया। इसी क्रम में पुरानी बाजार स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर और रूपईडीहा मार्ग स्थित सतरूपा अष्टभुजा मंदिर में सनातन भक्तों का जमावड़ा रहा, लोगों ने हनुमान चालीसा पाठ कर भजन कीर्तन किये। 

सतरूपा अष्टभुजा मंदिर में सनातन प्रचारक ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव ने उपस्थित आये भक्तों को बाल्मीकि रामायण में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र का महत्व बताते हुए सूर्य की शुभ अशुभ महादशा के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि सनातन धर्म में सूर्य का विशेष महत्व है, दिन की शुरुआत सूर्यदेव के दर्शन व अर्घ्य से होती है, इससे हमारा भाग्य तेज होता है तथा सोचे हुए कार्यों में सफलता मिलती है। आगे कहा कि जब प्रभु श्री राम रणभूमि में अंतिम दिवस रावण का सामना करने वाले थे उस दिन काफ़ी हताश थे तभी युद्ध देखने आये देवताओं के साथ आकाश में आगस्त्य ऋषि ने श्री राम के सामने प्रकट होकर आदित्य हृदय स्तोत्र का जाप करने का सुझाव दिया। आगस्त्य ऋषि ने तब कहा हे सूर्यवंशी राघव! देवाधि देव भगवान सूर्य नित्य उदय होने वाले, प्रभा का विस्तार करने वाले और संसार के स्वामी हैं। उनकी आराधना मात्र से प्राणियों के समस्त संकट मिट जाते हैं, प्रकाशवान सूर्य अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं और समस्त दिशाओं में विजय श्री प्रदान करते हैं, भगवान सूर्य की वंदना के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र जापकर रणभूमि में आगे बढ़ते हुए रावण का भी वध सरलता से संभव है। तब प्रभु श्री राम ने यह उपाय मानकर आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़कर सूर्य देव को तीन बार प्रणाम किया और पूरे उत्साह से रावण के वध का निश्चय कर आगे बढ़े, दुराचारी रावण का वध कर माँ सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। सनातन प्रचारक ध्यान प्रकाश ने ज्येष्ठ मास में बड़े मंगल को धूमधाम से मनाने का कारण बताया कि बाल्यकाल में पवनपुत्र हनुमान ने सूर्य को मधुर फल समझकर निगल लिया था जिससे हनुमान जी की आराधना से भीषण गर्मी में बढ़े तापमान को सहन करने की क्षमता प्राप्त होती है। इस अवसर पर मंदिर परिसर प्रभु श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।


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